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RanchiTribalJharkhand News Desk

जिला उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने दीपावली से पहले कुम्हार बस्ती पहुंचकर स्वयं दीये खरीदे, स्थानीय कारीगरों के श्रम और परंपरा को दिया नया सम्मान

जिला उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने दीपावली से पहले कुम्हार बस्ती पहुंचकर स्वयं दीये खरीदे, स्थानीय कारीगरों के श्रम और परंपरा को दिया नया सम्मान

जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि इन परिवारों को आत्मनिर्भर बनाया जाए, उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाए और उनकी कला-कौशल को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखा जाए

रांची: दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने एक अनूठा और सार्थक कदम उठाते हुए अरसंडे स्थित बोडया रोड, जय प्रकाश नगर के कुम्हार बस्ती में स्वयं पहुंचकर दीये खरीदे। यह विजिट मात्र औपचारिक नहीं, बल्कि पारंपरिक लघु कुटीर उद्योग को प्रोत्साहन देने, स्थानीय कारीगरों के कठिन परिश्रम को सम्मानित करने और उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में जिला प्रशासन की स्पष्ट मंशा को दर्शाती है।

कुम्हार परिवारों से सीधे संवाद किया और उनकी वर्तमान स्थिति, समस्याओं तथा जरूरतों को समझा

उपायुक्त ने मौके पर मौजूद कुम्हार परिवारों से सीधे संवाद किया और उनकी वर्तमान स्थिति, समस्याओं तथा जरूरतों को समझा। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन मुख्यमंत्री लघु कुटीर बोर्ड के माध्यम से इन कारीगरों को लगातार सहयोग प्रदान कर रहा है। चाहे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उपलब्ध कराना हो, प्रशिक्षण देना हो या अन्य किसी प्रकार की सहायता हो—जिला प्रशासन निरंतर सक्रिय रहा है। आगे भी जो भी सहयोग की आवश्यकता होगी, उसे पूरा किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिला इनोवेशन फंड के माध्यम से संरचना निर्माण, आवश्यक उपकरण और अन्य योजनागत सहायता उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि ये परिवार अधिक बेहतर परिस्थितियों में अपना पारंपरिक काम जारी रख सकें।

“इनके पसीने की कीमत चुकानी होगी”

उपायुक्त ने विशेष रूप से अपील करते हुए कहा कि दीया बनाने वाले कारीगर पूरे परिवार—बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक—के साथ मिलकर दिनों-रात मेहनत करते हैं। मिट्टी गूंथना, आकार देना, सुखाना और रंग-रोगन करना—यह सब अत्यंत श्रमसाध्य प्रक्रिया है। इसके बावजूद उनकी आमदनी बहुत कम रह जाती है। इसलिए उन्होंने नागरिकों से अनुरोध किया कि वे इनसे उचित मूल्य पर दीये खरीदें, ताकि इन परिवारों को इस रोजगार से वास्तविक आर्थिक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि जितनी अधिक संख्या में स्थानीय दीये खरीदे जाएंगे, उतनी ही इन कारीगरों को मजबूती मिलेगी। साथ ही बाहरी उत्पादों पर निर्भरता कम करने और स्थानीय बाजार तथा स्थानीय कौशल को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। जिला प्रशासन स्वयं इसी उद्देश्य से आज यहां पहुंचा है—कि स्थानीय उत्पादन को प्राथमिकता दी जाए और कुम्हार समुदाय को आर्थिक रूप से मजबूत किया जाए।

उपायुक्त ने एक महिला कारीगर से पेंशन मिलने संबंधी जानकारी ली। महिला ने बताया कि उन्हें पेंशन मिल रही है। उन्होंने क्षेत्र की सड़क की खराब स्थिति पर भी ध्यान दिया और संबंधित अधिकारी को तुरंत मरम्मत का निर्देश दिया, ताकि इन परिवारों को आने-जाने में सुविधा हो।

उपायुक्त ने खरीदारी पूरी करने के बाद डिजिटल माध्यम से स्वयं भुगतान किया। उन्हें एक़ छोटी बच्ची ने मिट्टी से बने खिलौना गिफ्ट किया। उनके इस स्नेह से उपायुक्त मोहित हो गए साथ ही उन्होंने बच्ची को भविष्य की शुभकामना दिया।

इस महत्वपूर्ण दौरे में अनुमंडल पदाधिकारी सदर रांची कुमार रजत, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था) श्री धनंजय, जिला परिवहन पदाधिकारी श्री अखिलेश कुमार, ट्रेनी आईएएस अधिकारी सुश्री आस्था शरण, जिला जन संपर्क पदाधिकारी उर्वशी पांडेय तथा डीआरपी रांची श्रीमती आतेन विश्वासी भी मौजूद रहे।

उपायुक्त के इस कदम को स्थानीय कुम्हार समुदाय में गहरी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। यह दौरा न केवल दीपावली के अवसर पर पारंपरिक दीयों को बढ़ावा देने का प्रयास है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जिला प्रशासन छोटे कारीगरों, पारंपरिक कौशल और स्थानीय अर्थव्यवस्था को कितना महत्व देता है। प्रशासन का लक्ष्य है कि इन परिवारों को आत्मनिर्भर बनाया जाए, उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जाए और उनकी कला-कौशल को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखा जाए।

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