Jharkhand: आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में उम्मीदवारों द्वारा किए जा रहे चुनाव खर्च पर राज्य चुनाव आयोग कड़ी नजर रखेगा। आयोग ने चुनाव खर्च की अधिकतम सीमा पहले ही निर्धारित कर दी है। इसके साथ ही यह सुनिश्चित करने के लिए खर्च निरीक्षकों (एक्सपेंडिचर ऑब्जर्वर्स) की नियुक्ति की गई है कि कोई उम्मीदवार तय सीमा से अधिक खर्च न करे। खर्च निरीक्षकों को चुनाव प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों के वित्तीय व्यवहार पर सतत निगरानी का दायित्व सौंपा गया है। आयोग ने इन निरीक्षकों को विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं ताकि चुनाव खर्च की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
निर्वाचन नोटिफिकेशन जारी होने के तुरंत बाद यानी 27 जनवरी के अगले दिन से ही खर्च निरीक्षक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पहुंच गए हैं। उनके पहले दौर में उन्हें सभी पार्टियों से मिलना होगा और चुनाव खर्च के नियंत्रण के लिए सहयोग लेना होगा। पहले दौर के दौरान निरीक्षक अपने क्षेत्र में तीन दिन रहेंगे और इस दौरान वे अपने सहायक निरीक्षकों की नियुक्ति भी करेंगे। सहायक निरीक्षकों की नियुक्ति के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी (डिप्टी कमिश्नर) की सूची से चयन किया जाएगा। यदि किसी सहायक निरीक्षक के कार्य से वे संतुष्ट नहीं होंगे, तो वे दूसरी सूची मांगकर किसी योग्य व्यक्ति को नियुक्त कर सकते हैं। इस दौरान खर्च निरीक्षक जिला निर्वाचन अधिकारी, पुलिस अधीक्षक, आयकर विभाग तथा राज्य मादक पदार्थ विभाग एवं प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय भी बनाए रखेंगे।
चुनाव चिह्न आवंटित होने के तुरंत बाद खर्च निरीक्षक अपने क्षेत्र में दूसरे दौर के लिए पहुंचेंगे। इस दौरे में वे चुनाव प्रचार के पूरे दौर में अपने क्षेत्र में रहेंगे। यह अवधि लगभग 16 दिन की होगी और निरीक्षक तभी क्षेत्र छोड़ेंगे जब मतदान पूरी तरह संपन्न हो जाएगा। इस दौरान वे चुनाव खर्चों पर सख्ती से निगरानी रखेंगे और किसी भी अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई के लिए सक्षम होंगे। उनका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वच्छ बनाना है ताकि धनबल के कारण चुनाव प्रभावित न हो।
चुनाव परिणाम घोषित होने के 30 दिन बाद खर्च निरीक्षक तीसरे दौर के दौरे पर अपने निर्वाचन क्षेत्र में सात दिनों तक रहेंगे। इस दौर में उनका मुख्य कार्य उम्मीदवारों द्वारा जमा किए गए चुनाव खर्चों के विवरण की जांच करना होगा। जिला निर्वाचन अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी उम्मीदवार अपने खर्चे की जानकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर आयोग को प्रस्तुत करें। उम्मीदवारों को परिणाम घोषित होने के 30 दिनों के अंदर अपने खर्चे की रिपोर्ट फाइल करनी होगी। खर्च निरीक्षकों की यह सतत निगरानी सुनिश्चित करेगी कि चुनाव खर्चों में गड़बड़ी न हो और चुनाव निष्पक्ष तरीके से संपन्न हों।
