Jharkahnd News : मनरेगा के तहत सामग्री मद के भुगतान के लिए जिलों को मिला बड़ा आवंटन, तकनीकी कर्मियों, मेट, स्वयं सहायता समूहों और विकास योजनाओं को मिलेगी राहत
Jharkahnd News : झारखंड सरकार ने मनरेगा के अंतर्गत लंबित सामग्री मद के भुगतान के लिए 172.65 करोड़ रुपये जारी किए हैं। जिलों को निर्देश दिया गया है कि 1 जुलाई 2026 से पहले तकनीकी सहायकों, मेट, स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न विकास योजनाओं से जुड़े सभी लंबित भुगतानों का निपटारा सुनिश्चित किया जाए।
झारखंड सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत लंबित भुगतानों के निपटारे के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य के मनरेगा आयुक्त कार्यालय ने सभी जिलों को सामग्री मद के भुगतान हेतु कुल 172.65 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है। यह राशि एसएनए-स्पर्श (SNA-SPARSH) मॉडल के माध्यम से जारी की गई है, जिससे लंबे समय से लंबित भुगतानों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
सरकार के इस फैसले से तकनीकी कर्मियों, मेट, स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और विभिन्न ग्रामीण विकास योजनाओं से जुड़े लाभुकों को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही विकास परियोजनाओं को भी नई गति मिलने की संभावना है।
जिलों को प्राथमिकता के आधार पर खर्च करने का निर्देश
मनरेगा आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सामग्री मद में केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 75:25 के अनुपात में है। जिलों को निर्देश दिया गया है कि आवंटित राशि का उपयोग तय प्राथमिकताओं के अनुसार किया जाए ताकि सभी लंबित देनदारियों का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित हो सके।
सरकार चाहती है कि पहले उन भुगतानों को प्राथमिकता दी जाए जो लंबे समय से लंबित हैं और जिनका सीधा प्रभाव मनरेगा के संचालन और ग्रामीण विकास कार्यों पर पड़ रहा है।
तकनीकी सहायकों और अभियंताओं के वेतन का होगा भुगतान
आवंटित राशि से तकनीकी सहायकों, सहायक अभियंताओं, कनीय अभियंताओं तथा बीएफटी (Bare Foot Technician) के जून 2026 तक के लंबित वेतन का भुगतान किया जाएगा। लंबे समय से भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे इन कर्मियों को सरकार के इस फैसले से बड़ी राहत मिलने वाली है।
इसके अलावा विभिन्न पंचायतों और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत मेट के लंबित मानदेय का भुगतान भी इसी राशि से किया जाएगा। इससे मनरेगा के तहत कार्यरत मानव संसाधन को आर्थिक राहत मिलेगी और कार्यों के संचालन में सुधार होगा।
दीदी बगिया योजना और स्वयं सहायता समूहों को लाभ
सरकार ने निर्देश दिया है कि दीदी बगिया योजना से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं की लंबित बकाया राशि का भी शीघ्र भुगतान किया जाए। राज्य में महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन के लिए यह योजना महत्वपूर्ण मानी जाती है।
लंबे समय से भुगतान की प्रतीक्षा कर रही महिला समूहों को इस राशि के जारी होने से राहत मिलेगी और उनकी आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की आय बढ़ाने और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहन देने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेष हरित ग्राम योजना की देनदारियां भी होंगी समाप्त
आवंटित राशि का उपयोग विशेष हरित ग्राम योजना के तहत लंबित देनदारियों के निपटारे में भी किया जाएगा। इसके अलावा जिन योजनाओं का कार्य पूरा हो चुका है, उनके भुगतान का निपटारा कर उन्हें मनरेगासॉफ्ट पोर्टल में बंद करने का निर्देश दिया गया है।
इससे न केवल वित्तीय प्रबंधन बेहतर होगा बल्कि लंबित योजनाओं का रिकॉर्ड भी व्यवस्थित किया जा सकेगा।
संताल परगना में गोड्डा को सबसे अधिक राशि
आवंटित राशि में विभिन्न जिलों को उनकी आवश्यकता और लंबित भुगतानों के आधार पर धनराशि दी गई है। संताल परगना प्रमंडल में गोड्डा जिले को सबसे अधिक 15 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। वहीं जामताड़ा जिले को 10.50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
सरकार का मानना है कि इस वित्तीय सहायता से जिलों में लंबित भुगतान संबंधी समस्याओं का समाधान होगा और ग्रामीण विकास कार्यों को नई गति मिलेगी।
1 जुलाई से पहले खर्च करने पर जोर
आयुक्त कार्यालय के पत्र में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार 1 जुलाई 2026 से मनरेगा के स्थान पर वीबीरामजी एक्ट लागू किए जाने का प्रस्ताव है। ऐसे में एसएनए-स्पर्श मॉडल के अंतर्गत जारी की गई राशि के उपयोग में भविष्य में प्रशासनिक चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं।
इसी कारण सभी जिलों को निर्देश दिया गया है कि उपलब्ध राशि का समयबद्ध और प्राथमिकता आधारित उपयोग सुनिश्चित किया जाए तथा 1 जुलाई से पहले अधिकतम लंबित भुगतानों का निपटारा कर लिया जाए।
ग्रामीण विकास परियोजनाओं को मिलेगी नई रफ्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि 172.65 करोड़ रुपये की इस बड़ी राशि से मनरेगा के तहत लंबित भुगतान की समस्या काफी हद तक कम होगी। इससे विकास योजनाओं का क्रियान्वयन तेज होगा, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा और योजनाओं में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।
सरकार के इस फैसले से हजारों तकनीकी कर्मियों, मेट, स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण लाभुकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। साथ ही राज्य में चल रही विकास परियोजनाओं को नई ऊर्जा और गति मिलने की उम्मीद है।
