Jharkhand News: रांची के पास चान्या गांव से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां चोरी के शक में एक युवक को भीड़ ने पीट पीटकर मार डाला। यह घटना झारखंड की राजधानी के बुढ़मू थाना क्षेत्र की है। मृतक की पहचान विक्की नायक के रूप में हुई है, जो चान्या गांव निवासी तुलसी नायक का बेटा था। गांव में कुएं से मोटर पंप चोरी होने के आरोप में ग्रामीणों ने बिना किसी ठोस सबूत के विक्की को दोषी मान लिया। यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि कानून अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति किस तरह समाज के लिए घातक बनती जा रही है।
जानकारी के मुताबिक 11 जनवरी की रात बुढ़मू थाना क्षेत्र में रहने वाले कामेश्वर यादव और विष्णु यादव के कुएं से मोटर पंप चोरी हो गया था। इस चोरी के बाद गांव में अफरा तफरी का माहौल बन गया। चोरी की घटना के बाद कुछ लोग सीधे चान्या गांव में तुलसी नायक के घर पहुंचे और उनके बेटे विक्की नायक पर चोरी का आरोप लगा दिया। हालांकि उस समय किसी भी तरह का पुख्ता सबूत सामने नहीं था। इसी बीच एक चोरी किया गया मोटर पंप कुएं के पास वापस रख दिया गया, लेकिन दूसरा पंप नहीं मिला। इसके बावजूद ग्रामीणों का शक विक्की पर बना रहा और उसी शक ने आगे चलकर हिंसक रूप ले लिया।
शुक्रवार सुबह गांव के कुछ लोग विक्की नायक के घर पहुंचे और मोटर पंप चोरी को लेकर पंचायत जैसी बैठक की। बैठक में लगातार विक्की पर चोरी कबूल करने का दबाव बनाया गया। विक्की ने खुद को निर्दोष बताया और आरोपों से इनकार करता रहा। इसी बात से गुस्साए ग्रामीणों ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। परिवार के सामने ही विक्की को लात घूंसों से बुरी तरह पीटा गया। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे बुढ़मू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां से डॉक्टरों ने उसे तुरंत रिम्स अस्पताल रेफर कर दिया। दुर्भाग्य से अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही विक्की ने दम तोड़ दिया।
मृतक की मां भुटकी देवी की शिकायत पर पुलिस ने सात नामजद आरोपियों और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं उनमें कामेश्वर यादव, सरुला मुंडा, बाबिया मुंडा, रंजीत महतो, मानव यादव, विनोद यादव और विजय मुंडा के नाम शामिल हैं। पुलिस ने इस मामले में कामेश्वर यादव समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। यह घटना न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि शक और अफवाह के आधार पर की गई हिंसा कैसे एक निर्दोष की जान ले सकती है।

