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Jharkhand Crime: साहिबगंज और गोड्डा में महिलाओं के खिलाफ अपराधों का सबसे अधिक रिकॉर्ड, जानिए आंकड़े

Jharkhand Crime: सांथल परगना क्षेत्र में महिलाओं के खिलाफ अपराध कम करने के लिए राज्य में कई जागरूकता अभियान चलाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद अपराधों में केवल मामूली कमी देखी गई है। प्रशासन और आम जनता दोनों को इस मामले में विशेष रुचि और सक्रियता दिखाने की आवश्यकता है। केंद्रीय सरकार भी महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लगातार सक्रिय है और इसके लिए कई कानून बनाए गए हैं। समय-समय पर सुरक्षा नियमों को मजबूत किया जाता है ताकि अपराधी सजा से बच न सकें। झारखंड पुलिस की वेबसाइट के अनुसार, 2025 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि दर्ज की गई है।

जनवरी से अक्टूबर 2025 तक, सांथल परगना के सभी जिलों (दुमका, गोड्डा, जमताड़ा, देवघर, साहिबगंज, पाकुर) में महिलाओं के खिलाफ कुल 293 बलात्कार के मामले दर्ज हुए। इनमें सबसे अधिक, 71 मामले साहिबगंज जिले में सामने आए। गोड्डा और दुमका में 54-54 मामले, जमताड़ा में 33, देवघर में 52 और पाकुर में 40 मामले दर्ज किए गए।

दहेज उत्पीड़न के मामलों में भी साहिबगंज सबसे ऊपर है। जनवरी से अक्टूबर 2025 तक यहां 52 मामले दर्ज किए गए। गोड्डा जिले में 42 और देवघर में सबसे कम मामले सामने आए। कुल मिलाकर, इस अवधि में सभी जिलों में दहेज उत्पीड़न के 161 मामले दर्ज हुए। ये मामले केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षित क्षेत्रों में भी महिलाओं पर दहेज उत्पीड़न के मामले सामने आए हैं। महिलाओं को प्रताड़ित करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई आवश्यक है।

महिलाओं के उत्पीड़न के मामले भी चिंताजनक हैं। जनवरी से अक्टूबर 2025 तक, देवघर में 38, गोड्डा में 40, दुमका में 23, साहिबगंज में 19, पाकुर में 16 और जमताड़ा में 15 मामलों के साथ कुल 151 मामले दर्ज किए गए। वहीं, महिलाओं के अपहरण के मामले भी बढ़ रहे हैं। 2025 में इसी अवधि में गोड्डा जिले से 115, देवघर से 80, साहिबगंज से 49 और पाकुर से सबसे कम मामले दर्ज किए गए। पिछले वर्ष 2024 की तुलना में महिलाओं के अपहरण के मामले बढ़कर 355 हो गए हैं।

समाज में उभरती समस्याओं का एक बड़ा कारण मोबाइल और सोशल मीडिया को माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि माता-पिता को बच्चों में सही मूल्य और शिक्षा विकसित करनी चाहिए और मोबाइल के उपयोग को सीमित करना चाहिए। सोशल वेलफेयर विभाग, मंथन संगठन, चाइल्डलाइन और चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट ग्रामीण क्षेत्रों और साप्ताहिक बाजारों में जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। बाल विवाह और महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में परामर्श और सहायता प्रदान की जा रही है। गरीबों को मुफ्त कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि उन्हें न्याय मिल सके। सामाजिक जागरूकता और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाकर ही महिलाओं के खिलाफ अपराधों को कम किया जा सकता है।

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घा सिन्हा एक समर्पित और प्रतिभाशाली कंटेंट राइटर, वेबसाइट अपडेटर और डिजिटल हैंडलर हैं, जो बीते कई वर्षों से न्यूज़ और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वे विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर गहराई से शोध कर सटीक, संतुलित और प्रभावी लेखन प्रस्तुत करती हैं। उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और पाठकों को सहज रूप से जोड़ने वाली है, जिससे जटिल खबरें भी आसानी से समझी जा सकती हैं। इसके साथ ही मेघा वेबसाइट मैनेजमेंट, कंटेंट अपडेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म हैंडलिंग में भी दक्ष हैं। वे नियमित रूप से वेबसाइट को अपडेट रखने, खबरों को समय पर प्रकाशित करने और कंटेंट की गुणवत्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनकी मेहनत, लगन और प्रोफेशनल अप्रोच ने उन्हें एक भरोसेमंद और प्रभावशाली मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है, जो समाज में जागरूकता फैलाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।
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