uangtogel

23 C
Delhi
Tuesday, March 3, 2026
Homejharkhandझारखंड में DAHAR 2.0 सर्वे पर विवाद, आदिवासी विरोध के बाद धर्म...

झारखंड में DAHAR 2.0 सर्वे पर विवाद, आदिवासी विरोध के बाद धर्म कॉलम में ‘अन्य’ जोड़ा

झारखंड में स्कूली बच्चों के लिए कराए जा रहे DAHAR 2.0 सर्वे को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। यह सर्वे झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा समग्र शिक्षा अभियान के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का नामांकन, ड्रॉपआउट दर और शैक्षणिक जरूरतों का आकलन करना है। हालांकि, सर्वे के धर्म कॉलम में आदिवासी पारंपरिक आस्थाओं के लिए अलग विकल्प न होने पर आदिवासी संगठनों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। विवाद बढ़ने के बाद शिक्षा विभाग ने सर्वे में ‘अन्य’ (Other) धर्म का विकल्प जोड़ दिया है। इसके बावजूद कई आदिवासी संगठन इसे केवल आधा समाधान मान रहे हैं और स्पष्ट ‘सारना’ कोड की मांग पर अड़े हुए हैं।

DAHAR 2.0 सर्वे के शुरुआती प्रारूप में धर्म के लिए केवल छह विकल्प दिए गए थे—हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन और बौद्ध। इसमें न तो सारना धर्म और न ही अन्य पारंपरिक आदिवासी आस्थाओं के लिए कोई अलग कॉलम था। आदिवासी संगठनों का कहना है कि इससे आदिवासी बच्चों को मजबूरी में किसी अन्य धर्म श्रेणी में दर्ज किया जाएगा, जिससे उनकी वास्तविक धार्मिक पहचान मिट जाएगी। संगठनों ने आरोप लगाया कि इस तरह की व्यवस्था सरकारी स्तर पर आदिवासियों को हिंदू के रूप में दर्ज करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दे सकती है। उनका कहना है कि यदि सर्वे डेटा ही गलत होगा, तो उसी आधार पर बनने वाली नीतियां, योजनाएं और बजट भी आदिवासी समाज की वास्तविक जरूरतों को नहीं दर्शा पाएंगे।

इस मुद्दे पर कई आदिवासी नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने खुलकर आपत्ति जताई। आदिवासी नेता प्रेमशाही मुंडा और पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता गीता ओरांव ने कहा कि ‘अन्य’ विकल्प के बिना आदिवासी धार्मिक पहचान को अदृश्य बना दिया जाता है। उनका तर्क है कि झारखंड जैसे पांचवीं अनुसूची वाले राज्य में, जहां आदिवासी समाज की एक विशिष्ट सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है, वहां ऐसे सर्वे में अलग धर्म कोड न देना संविधान की भावना के खिलाफ है। गीता ओरांव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार वर्ष 2020 के बाद से विभिन्न सरकारी पोर्टलों से ‘अन्य धर्म’ विकल्प को धीरे-धीरे हटाने की दिशा में काम कर रही है। उनके अनुसार, यह एक सोची-समझी रणनीति है, जिससे आदिवासी पहचान को कमजोर किया जा सके और नीतिगत फैसलों में उनकी वास्तविक स्थिति सामने न आए।

विवाद बढ़ने के बाद झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के परियोजना निदेशक शशि रंजन ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि DAHAR 2.0 सर्वे का फॉर्मेट केंद्र सरकार से प्राप्त किया गया था और राज्य ने केवल पहले से मौजूद प्रश्नावली को डिजिटल रूप में लागू किया। उन्होंने बताया कि यह सर्वे कोई नया नहीं है, बल्कि हर साल किया जाता है और पहले यह भौतिक फॉर्म के जरिए होता था, जिसमें ‘अन्य’ धर्म का विकल्प पहले से मौजूद था। ऐप आधारित सिस्टम में तकनीकी कारणों से कुछ फील्ड सही तरीके से दिखाई नहीं दे रहे थे, जिसे अब ठीक कर लिया गया है। शिक्षा विभाग का कहना है कि DAHAR सर्वे का उपयोग स्कूल कवरेज की योजना, ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान और समग्र शिक्षा अभियान के तहत बुनियादी ढांचे व कल्याणकारी योजनाओं की रूपरेखा तैयार करने में किया जाता है। इसलिए यह जरूरी है कि सर्वे डेटा सभी समुदायों की वास्तविक तस्वीर को सही ढंग से दर्शाए।

jnews
jnewshttp://jharkhandnews.com
नेहा यादव पिछले पाँच वर्षों से एक प्रतिभाशाली और समर्पित न्यूज़ आर्टिकल राइटर के रूप में काम कर रही हैं। उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर गहराई से शोध कर, समाचारों को सटीक और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का अपना अनूठा अंदाज विकसित किया है। उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और आकर्षक है जिससे पाठकों को जानकारी समझने में आसानी होती है। नेहा हर दिन नवीनतम घटनाओं और विषयों पर अपडेट रहती हैं और उन्हें व्यापक दृष्टिकोण से दर्शाने का प्रयास करती हैं। उनकी मेहनत और लगन ने उन्हें न्यूज़ वेबसाइट पर विश्वसनीय और सम्मानित लेखक बना दिया है। वे लगातार समाज के मुद्दों को उजागर करने और जागरूकता फैलाने में योगदान दे रही हैं।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

https://gregabandoned.com/urbex/

slot jepang

slot27

sip777

barudak88

barudak88

slot bet 100

https://www.bbadgvc.com/

togel china

https://therealicyspot.com/is-italian-ice-healthier-than-ice-cream/ https://therealicyspot.com/is-italian-ice-keto-friendly/

hongkong slot

hongkong slot

mahjong slot

slot scatter hitam

slot777