आजादी के 79 साल बाद भी झारखंड के सौरिया पहाड़िया समुदाय के जीवन में रोजगार एक बड़ी कमी है. विकास की दस्तक के बावजूद, स्थायी आजीविका का रास्ता धुंधला है, जहां जंगल ही उनके जीवन का आधार है. यह रिपोर्ट उनकी समस्याओं और उम्मीदों को सामने लाती है. The post जंगल बचा तो बचेगी पहचान: सुंदरपहाड़ी और राजमहल …