रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने उस समय की ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर, सुष्मिता प्रिया (उर्फ सुष्मिता गुप्ता) को कोई राहत देने से मना कर दिया है, जिन पर MGNREGA स्कीम के तहत ट्यूबवेल बनाने के लिए मंजूर किए गए 3.11 लाख रुपये से ज़्यादा के कथित गबन का आरोप है।
हाई कोर्ट ने आरोपी की बर्खास्तगी की अर्जी खारिज कर दी और ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। क्रिमिनल रिव्यू अर्जी को खारिज करते हुए, हाई कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद चीज़ों के आधार पर ट्रायल कोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई आधार नहीं है।
यह मामला मेंढर पुलिस स्टेशन के केस नंबर 109/2018 से जुड़ा है। प्रॉसिक्यूशन के अनुसार, 3 जनवरी 2018 को डिप्टी डेवलपमेंट कमिश्नर के ऑफिस से मिले एक लेटर के बाद की गई जांच में पता चला कि जलेश्वर लोहारा के नाम पर एक ट्यूबवेल बनाने के लिए MGNREGA स्कीम के तहत 311,244 रुपये मंजूर किए गए थे। आरोप है कि इसमें शामिल लोगों ने बिना कोई काम किए पैसे हड़प लिए।
इस मामले में इंडियन पीनल कोड (IPC) के सेक्शन 406 और 409 के तहत FIR दर्ज की गई थी। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने चार्जशीट फाइल की। इसके बाद, ट्रायल कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया और आरोपियों के खिलाफ IPC के सेक्शन 406, 420 और 409 के तहत कार्रवाई शुरू की।