Jharkhand News : झारखण्ड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव से ग्रामीण महिलाओं और किसानों को मिल रही नई पहचान, 2240 क्विंटल आम की बिक्री से 60.51 लाख रुपये का कारोबार, दुबई और लंदन तक पहुंचा झारखण्ड का आम।
Jharkhand News : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखण्ड का ‘पलाश’ ब्रांड ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है। झारखण्ड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव के तहत हजारों महिला किसानों और सखी मंडल की दीदियों को रोजगार और बाजार उपलब्ध हुआ है। राज्य के आम अब देश के बड़े रिटेल नेटवर्क के साथ-साथ दुबई और लंदन जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।
रांची: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की दूरदर्शी सोच और ग्रामीण महिलाओं की अथक मेहनत ने झारखण्ड के ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक परिवर्तन की नई कहानी लिखी है। राज्य सरकार की पहल और ग्रामीण समुदाय की सहभागिता से ‘पलाश’ ब्रांड आज आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत प्रतीक बनकर उभरा है। झारखण्ड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव के माध्यम से राज्य के किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच मिली है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
राज्य सरकार की यह पहल केवल आम की खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने का भी बड़ा माध्यम बन रही है। आज झारखण्ड का आम देश के प्रमुख शहरों से लेकर विदेशों तक अपनी मिठास बिखेर रहा है।
बिरसा हरित ग्राम योजना से मिली नई दिशा
कोरोना काल के दौरान ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने और प्रवासी श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई बिरसा हरित ग्राम योजना आज सफलता का उदाहरण बन चुकी है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के निर्देश पर शुरू की गई इस योजना के तहत बड़े पैमाने पर फलदार पौधों का रोपण किया गया।
वर्तमान में राज्य के लगभग 1.86 लाख एकड़ क्षेत्रफल में आम के बागान विकसित हो चुके हैं। इससे करीब 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार और आय का स्रोत प्राप्त हुआ है। इस वर्ष लगभग 52 हजार एकड़ बागान पूरी तरह तुड़ाई के लिए तैयार हैं, जहां से करीब 50 हजार मीट्रिक टन आम उत्पादन का अनुमान लगाया गया है।
ग्रामीण महिलाओं ने संभाली मार्केटिंग की कमान
झारखण्ड की सखी मंडल की दीदियां इस पूरी पहल की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई हैं। महिलाएं केवल खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आम के संग्रहण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन तक की जिम्मेदारी स्वयं निभा रही हैं।
झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) द्वारा किसानों को विभिन्न फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FPO) से जोड़ा गया है, जिससे किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल रहा है। महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार किया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ी झारखण्ड के आम की मांग
झारखण्ड के आम ने अब वैश्विक बाजार में भी अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य ने आम निर्यात के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
सिमडेगा जिले से जेबी एक्सपोर्टर्स के माध्यम से 1,580 किलोग्राम प्रीमियम आम सीधे लंदन भेजे गए हैं। वहीं रामगढ़ क्लस्टर से 1,500 मीट्रिक टन से अधिक आम दुबई निर्यात किए जा चुके हैं। इस निर्यात अभियान में सिमडेगा, रामगढ़ और पूर्वी सिंहभूम जिले प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
आम की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय मानकों को सुनिश्चित करने के लिए आईसीएआर-आरसीईआर, पलांडू द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन और गुणवत्ता नियंत्रण संबंधी सहायता प्रदान की जा रही है। इससे झारखण्ड के आम को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी पहचान मिल रही है।
ग्रेडिंग के आधार पर तैयार की गई मार्केटिंग रणनीति
किसानों को अधिकतम लाभ दिलाने के उद्देश्य से आमों को गुणवत्ता के आधार पर तीन श्रेणियों – ग्रेड ए, ग्रेड बी और ग्रेड सी में विभाजित किया गया है।
ग्रेड-ए के प्रीमियम आमों को APEDA प्रमाणित निर्यातकों के माध्यम से यूएई, सऊदी अरब और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में भेजा जा रहा है। घरेलू बाजार में इन्हें पलाश मार्ट और अपना मार्ट के माध्यम से 60 रुपये प्रति किलो की दर से सह-ब्रांडेड पैकेजिंग में बेचा जा रहा है।
ग्रेड-बी आमों को संगठित खुदरा बाजारों और पलाश के विभिन्न रिटेल चैनलों तक पहुंचाया जा रहा है। वहीं ग्रेड-सी आमों को स्थानीय बाजारों, पलाश कैनोपी कियोस्क, बस स्टैंड, जिला मुख्यालयों और साप्ताहिक हाट-बाजारों के जरिए आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा है।
60 लाख रुपये से अधिक का कारोबार
झारखण्ड में सक्रिय लगभग 115 एफपीओ को पलाश मैंगो कैनोपी काउंटर्स से जोड़ा गया है। ये संगठन जिला स्तर पर संग्रहण, परिवहन और बिक्री का कार्य कर रहे हैं।
इन कैनोपी काउंटर्स के माध्यम से अब तक राज्य में लगभग 2,24,200 किलोग्राम (2240 क्विंटल) आमों की बिक्री हो चुकी है। इससे 60.51 लाख रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा ग्रामीण किसानों और महिला समूहों की बढ़ती आर्थिक क्षमता का प्रमाण माना जा रहा है।
कॉर्पोरेट सेक्टर के सहयोग से मिलेगा बड़ा बाजार
राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियां झारखण्ड के आम को और बड़े बाजारों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। बाजार विस्तार के लिए ब्लॉक और जिला स्तर पर किसान मेले तथा बायर-सेलर मीट आयोजित किए जा रहे हैं।
इसके साथ ही ऑनलाइन और आधुनिक रिटेल बाजार में प्रवेश के लिए ब्लिंकिट, रिलायंस फ्रेश और कशिश मॉल जैसे कॉर्पोरेट संस्थानों के साथ बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यदि ये साझेदारियां सफल होती हैं तो झारखण्ड के किसानों और महिला समूहों को और बड़ा बाजार मिलेगा, जिससे उनकी आय में कई गुना वृद्धि हो सकती है।
ग्रामीण विकास का नया मॉडल बन रहा झारखण्ड
‘पलाश’ ब्रांड के माध्यम से झारखण्ड ने यह साबित कर दिया है कि यदि सरकार की योजनाएं सही दिशा में लागू हों और ग्रामीण समुदाय को बाजार से जोड़ा जाए, तो गांवों की तस्वीर बदली जा सकती है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में शुरू की गई यह पहल आज ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण, किसानों की समृद्धि और राज्य की आर्थिक प्रगति का सफल मॉडल बनकर उभर रही है।
