uangtogel

23 C
Delhi
Sunday, June 21, 2026
HomejharkhandJharkhand News : झारखंड के लिए गौरव का क्षण: दिशोम गुरु शिबू...

Jharkhand News : झारखंड के लिए गौरव का क्षण: दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत मिलेगा पद्म भूषण सम्मान

23 जून को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ग्रहण करेंगे देश का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान, आदिवासी समाज और झारखंड आंदोलन में शिबू सोरेन के ऐतिहासिक योगदान को मिला राष्ट्रीय सम्मान।

झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन यह सम्मान ग्रहण करेंगे। जानिए उनके संघर्ष, सामाजिक योगदान और राजनीतिक सफर की पूरी कहानी।

झारखंड की राजनीति, आदिवासी समाज और राज्य निर्माण आंदोलन के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। झारखंड आंदोलन के महानायक और दिशोम गुरु के नाम से प्रसिद्ध शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान 23 जून को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष अलंकरण समारोह में प्रदान किया जाएगा।

इस अवसर पर उनके बड़े पुत्र और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों यह सम्मान ग्रहण करेंगे। यह सिर्फ शिबू सोरेन के परिवार या झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड राज्य और आदिवासी समाज के लिए गर्व और सम्मान का क्षण माना जा रहा है।

आजीवन संघर्ष और जनसेवा को मिला सम्मान

दिशोम गुरु शिबू सोरेन को यह सम्मान लोक कल्याण, आदिवासी अधिकारों की रक्षा और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए किए गए उनके आजीवन संघर्ष के लिए दिया जा रहा है। उन्होंने अपना पूरा जीवन आदिवासी समुदाय को संगठित करने, उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ लड़ाई लड़ने में समर्पित कर दिया।

शिबू सोरेन का नाम झारखंड आंदोलन के उन प्रमुख नेताओं में शामिल है, जिन्होंने अलग राज्य की मांग को जन आंदोलन का स्वरूप दिया। उनके अथक प्रयासों और लंबे संघर्ष का ही परिणाम था कि वर्ष 2000 में झारखंड एक अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर हुई थी घोषणा

केंद्र सरकार ने इस वर्ष गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा के दौरान शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान देने का ऐलान किया था। इस घोषणा के बाद पूरे झारखंड में खुशी की लहर दौड़ गई थी।

हालांकि राज्य में लंबे समय से उन्हें भारत रत्न देने की मांग भी उठती रही है। झारखंड विधानसभा ने भी इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से शिबू सोरेन को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की थी। राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि झारखंड आंदोलन और आदिवासी समाज के लिए उनके योगदान को देखते हुए वे इस सर्वोच्च सम्मान के भी पात्र हैं।

महाजनी प्रथा के खिलाफ छेड़ा था बड़ा आंदोलन

शिबू सोरेन सिर्फ एक राजनेता ही नहीं बल्कि एक बड़े सामाजिक सुधारक भी थे। उन्होंने आदिवासियों के शोषण का प्रमुख कारण मानी जाने वाली महाजनी प्रथा के खिलाफ व्यापक आंदोलन चलाया। उस समय सूदखोर महाजन आदिवासियों की जमीन और संपत्ति पर कब्जा कर लेते थे। इसके खिलाफ शिबू सोरेन ने लोगों को संगठित किया और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष किया।

उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए और आदिवासी समाज को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में काम किया। उनकी यही संघर्षशील छवि उन्हें आम लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाती थी।

धान कटनी आंदोलन और नशा मुक्ति अभियान से मिली पहचान

दिशोम गुरु ने आदिवासी समाज को संगठित करने के लिए कई सामाजिक आंदोलनों की शुरुआत की। इनमें धान कटनी आंदोलन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। इस आंदोलन के माध्यम से उन्होंने किसानों और आदिवासियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया।

इसके अलावा उन्होंने नशा मुक्ति अभियान भी चलाया। उनका मानना था कि शराब और अन्य नशे की लत आदिवासी समाज के विकास में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। इसलिए उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों को नशे से दूर रहने और शिक्षा तथा विकास की ओर बढ़ने का संदेश दिया।

शिक्षा के लिए चलाते थे रात्रि पाठशाला

बहुत कम लोग जानते हैं कि शिबू सोरेन ने शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किए। वर्ष 1970 से 1975 के बीच उन्होंने रात्रि पाठशालाओं का संचालन किया। इन पाठशालाओं का उद्देश्य उन लोगों को शिक्षा देना था जो दिनभर मजदूरी या अन्य कामों में व्यस्त रहते थे।

रात के समय पढ़ाई की व्यवस्था कर उन्होंने सैकड़ों लोगों को शिक्षित करने का प्रयास किया। यही कारण था कि लोग उन्हें सम्मानपूर्वक “गुरुजी” कहकर पुकारने लगे। बाद में यही संबोधन उनकी पहचान बन गया और वे पूरे झारखंड में गुरुजी के नाम से प्रसिद्ध हुए।

उनका मानना था कि समाज की वास्तविक उन्नति शिक्षा के माध्यम से ही संभव है। वे लोगों को शादी-विवाह और त्योहारों में अनावश्यक खर्च कम करने तथा बच्चों की शिक्षा पर अधिक ध्यान देने की सलाह देते थे।

झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना और राजनीतिक सफर

झारखंड आंदोलन को संगठित रूप देने के लिए शिबू सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह संगठन आगे चलकर झारखंड आंदोलन का सबसे बड़ा राजनीतिक मंच बना।

राजनीतिक जीवन में भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वे चार बार दुमका लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। इसके अलावा उन्हें केंद्र सरकार में केंद्रीय कोयला मंत्री के रूप में भी कार्य करने का अवसर मिला।

शिबू सोरेन झारखंड के मुख्यमंत्री भी बने। भले ही उनका मुख्यमंत्री कार्यकाल लंबा नहीं रहा, लेकिन उन्होंने राज्य के विकास और आदिवासी हितों को प्राथमिकता देने का प्रयास किया। उनके नेतृत्व ने झारखंड की राजनीति को नई दिशा दी।

पूरे झारखंड के लिए भावनात्मक पल

4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में इलाज के दौरान शिबू सोरेन का निधन हो गया था। उनके निधन से झारखंड की राजनीति और सामाजिक जीवन में एक बड़ा शून्य उत्पन्न हुआ। आज भी लाखों लोग उन्हें आदिवासी अस्मिता, संघर्ष और सामाजिक न्याय के प्रतीक के रूप में याद करते हैं।

23 जून को जब राष्ट्रपति भवन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पद्म भूषण सम्मान ग्रहण करेंगे, तब यह केवल एक पुरस्कार समारोह नहीं होगा, बल्कि झारखंड आंदोलन, आदिवासी स्वाभिमान और दशकों तक चले संघर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता का ऐतिहासिक क्षण होगा।

दिशोम गुरु शिबू सोरेन का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सामाजिक परिवर्तन के लिए समर्पण, संघर्ष और जनसेवा का मार्ग कभी व्यर्थ नहीं जाता। पद्म भूषण सम्मान उनके योगदान के प्रति देश की ओर से एक श्रद्धांजलि और सम्मान है, जिसे आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी।

jnews
jnewshttp://jharkhandnews.com
घा सिन्हा एक समर्पित और प्रतिभाशाली कंटेंट राइटर, वेबसाइट अपडेटर और डिजिटल हैंडलर हैं, जो बीते कई वर्षों से न्यूज़ और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वे विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर गहराई से शोध कर सटीक, संतुलित और प्रभावी लेखन प्रस्तुत करती हैं। उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और पाठकों को सहज रूप से जोड़ने वाली है, जिससे जटिल खबरें भी आसानी से समझी जा सकती हैं। इसके साथ ही मेघा वेबसाइट मैनेजमेंट, कंटेंट अपडेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म हैंडलिंग में भी दक्ष हैं। वे नियमित रूप से वेबसाइट को अपडेट रखने, खबरों को समय पर प्रकाशित करने और कंटेंट की गुणवत्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनकी मेहनत, लगन और प्रोफेशनल अप्रोच ने उन्हें एक भरोसेमंद और प्रभावशाली मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है, जो समाज में जागरूकता फैलाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments

https://gregabandoned.com/urbex/

slot jepang

slot27

sip777

agung11

barudak88

barudak88

slot bet 100

https://www.bbadgvc.com/

togel china

https://therealicyspot.com/is-italian-ice-healthier-than-ice-cream/ https://therealicyspot.com/is-italian-ice-keto-friendly/

hongkong slot

hongkong slot

mahjong slot

slot scatter hitam

pgsoft

slot qris

https://www.octhaimassage.com/services slot 4d

spaceman