Jharkhand News : झारखंड में लंबे समय से खाली पड़े सूचना आयुक्तों के पदों को भरने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। राज्यपाल संतोष गंगवार ने सूचना आयुक्त पद के लिए प्रस्तावित चार नामों को मंजूरी प्रदान कर दी है। इस निर्णय के साथ ही राज्य में सूचना के अधिकार (RTI) कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और लंबित मामलों के त्वरित निपटारे की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
Jharkhand News : राज्यपाल द्वारा स्वीकृत नामों में वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा, तनुज खत्री, अमूल्य नीरज खलखो और शिवपूजन पाठक शामिल हैं। इन चारों व्यक्तियों का चयन उनके विभिन्न क्षेत्रों में अनुभव और विशेषज्ञता को ध्यान में रखते हुए किया गया है। सरकार ने पत्रकारिता, कानून, प्रशासन तथा सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्रों से जुड़े अनुभवी लोगों को शामिल कर एक संतुलित और विविधतापूर्ण पैनल तैयार करने का प्रयास किया है।
चयन प्रक्रिया के बाद मिली अंतिम मंजूरी
जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने 25 मार्च को इन नामों की अनुशंसा राजभवन को भेजी थी। इसके बाद राजभवन स्तर पर प्रस्तावित नामों की समीक्षा की गई। शुरुआती दौर में कुछ नामों को लेकर आपत्तियां भी सामने आई थीं, क्योंकि उनमें से कुछ व्यक्तियों का संबंध सक्रिय राजनीति से जुड़ा माना जा रहा था।
राजभवन ने इस संबंध में सरकार से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा था। सरकार की ओर से आवश्यक जानकारी और स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने के बाद अब राज्यपाल ने सभी चार नामों को मंजूरी दे दी है। इस स्वीकृति के साथ नियुक्ति प्रक्रिया लगभग पूरी हो गई है और जल्द ही औपचारिक नियुक्ति आदेश जारी होने की संभावना है।
सूचना आयोग में लंबे समय से थी आयुक्तों की कमी
झारखंड सूचना आयोग पिछले कई वर्षों से आयुक्तों की कमी से जूझ रहा था। आयोग में पर्याप्त संख्या में सूचना आयुक्त नहीं होने के कारण सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत दायर अपीलों और शिकायतों के निपटारे में भारी देरी हो रही थी।
सूत्रों के अनुसार आयोग के समक्ष हजारों मामले लंबित हैं, जिनमें दूसरी अपीलें और शिकायतें शामिल हैं। सूचना मांगने वाले नागरिकों को न्याय पाने के लिए महीनों नहीं बल्कि कई मामलों में वर्षों तक इंतजार करना पड़ रहा था। ऐसे में नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को प्रशासनिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आरटीआई व्यवस्था को मिलेगा नया बल
सूचना का अधिकार अधिनियम लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। इसके तहत नागरिकों को सरकारी विभागों और संस्थानों से जानकारी प्राप्त करने का कानूनी अधिकार मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सूचना आयोग में पर्याप्त संख्या में आयुक्तों की नियुक्ति होने से न केवल लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी, बल्कि सरकारी विभागों की जवाबदेही भी बढ़ेगी। इससे नागरिकों का आरटीआई व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत होगा।
सरकार के फैसले का स्वागत
सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों, आरटीआई कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से आयोग में रिक्त पदों को भरने की मांग की जा रही थी। अब नियुक्तियां होने से आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और आम लोगों को समय पर न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि सूचना आयोग की सक्रियता प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे सरकारी योजनाओं और निर्णयों की निगरानी भी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी।
राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद अब नियुक्ति संबंधी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद नए सूचना आयुक्त पदभार ग्रहण करेंगे और आयोग में लंबित मामलों की सुनवाई शुरू हो सकेगी। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में झारखंड सूचना आयोग की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।
सूचना के अधिकार को मजबूत करने और पारदर्शी शासन व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में यह निर्णय झारखंड सरकार और राजभवन की ओर से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
