Jharkhand News : 1 जून 2026 से लागू हुआ नया नियम, सड़क, पार्क, पुस्तकालय और विकास परियोजनाओं के लिए जमीन दान करने वालों को मिलेगा 100% शुल्क माफी का लाभ
Jharkhand News : झारखंड सरकार ने सार्वजनिक विकास कार्यों को गति देने और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब जनहित में जमीन दान करने वाले भू-स्वामियों को स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस से पूरी छूट मिलेगी। यह व्यवस्था 1 जून 2026 से लागू हो गई है।
रांची: राज्य में विकास कार्यों को नई रफ्तार देने के उद्देश्य से झारखंड सरकार ने जमीन दान करने वाले भू-स्वामियों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। सरकार ने फैसला लिया है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी निजी जमीन सरकार या जनहित से जुड़ी परियोजनाओं के लिए दान करता है, तो उसे स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क नहीं देना होगा। इस संबंध में राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है।
सरकार का मानना है कि इस कदम से सड़क, पार्क, पुस्तकालय, सामुदायिक भवन, ग्रामीण और शहरी विकास परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आसान होगी। लंबे समय से कई लोग सामाजिक और सार्वजनिक हित के लिए जमीन दान करना चाहते थे, लेकिन रजिस्ट्रेशन और स्टाम्प शुल्क के अतिरिक्त खर्च के कारण आगे नहीं बढ़ पाते थे। नई व्यवस्था के बाद यह आर्थिक बाधा समाप्त हो जाएगी।
किन मामलों में मिलेगी 100 प्रतिशत छूट?
सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार दो प्रमुख श्रेणियों में यह लाभ दिया जाएगा। पहली श्रेणी में वे भू-स्वामी शामिल होंगे जो अपनी निजी जमीन झारखंड सरकार, सरकारी उपक्रमों या सार्वजनिक उपयोग वाली परियोजनाओं के लिए दान करेंगे। ऐसी जमीन का उपयोग सड़क निर्माण, पार्क, पुस्तकालय, सामुदायिक सुविधाओं और अन्य विकास कार्यों के लिए किया जाएगा।
दूसरी श्रेणी में झारखंड सरकार की पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति के तहत अधिसूचित और चिन्हित भूमि से संबंधित दस्तावेज शामिल हैं। इन मामलों में भी लाभार्थियों को स्टाम्प शुल्क और निबंधन शुल्क से पूरी छूट दी जाएगी।
1 जून 2026 से लागू हुई नई व्यवस्था
विभागीय अधिसूचना के अनुसार यह नई व्यवस्था 1 जून 2026 से प्रभावी हो चुकी है। इससे पहले 27 मई 2026 को आयोजित झारखंड मंत्रिपरिषद की बैठक में एजेंडा संख्या-31 के तहत इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी। राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद इसे लागू कर दिया गया।
सरकार के अनुसार यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने के साथ-साथ जनहित की परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इससे सरकारी योजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण का दबाव भी कम हो सकता है और स्वैच्छिक भागीदारी बढ़ सकती है।
कानूनी प्रावधानों के तहत मिली राहत
सरकार ने यह छूट भारतीय मुद्रांक अधिनियम, 1899 की धारा-9 और धारा-3 के परंतुक (1) के तहत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए प्रदान की है। वहीं, निबंधन अधिनियम, 1908 की धारा-78 के तहत रजिस्ट्रेशन शुल्क को भी पूरी तरह माफ किया गया है।
कानूनी रूप से यह व्यवस्था उन लोगों के लिए राहत लेकर आई है जो सामाजिक और सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए अपनी भूमि दान करना चाहते हैं। इससे दस्तावेजी प्रक्रिया आसान होगी और आर्थिक बोझ भी कम होगा।
विकास परियोजनाओं को मिलेगी नई गति
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं को जमीन उपलब्ध कराने में तेजी आएगी। सड़क निर्माण, सार्वजनिक भवन, खेल मैदान, पार्क, पुस्तकालय और अन्य सामुदायिक ढांचे के निर्माण में आने वाली भूमि संबंधी चुनौतियां कम हो सकती हैं।
सरकार इस कदम को जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल के रूप में देख रही है। यदि लोग स्वेच्छा से सार्वजनिक उपयोग के लिए भूमि उपलब्ध कराते हैं, तो इससे राज्य के बुनियादी ढांचे के विस्तार को गति मिलेगी और विकास कार्यों में स्थानीय सहयोग भी बढ़ेगा।
झारखंड सरकार का यह फैसला न सिर्फ जमीन दान करने वालों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि यह राज्य के समग्र विकास और सार्वजनिक सुविधाओं के विस्तार की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
