मेहरमा प्रखंड में मुख्यमंत्री Maiyan Samman Scheme के लाभार्थियों से सत्यापन के नाम पर आधार, बैंक पासबुक और अन्य दस्तावेज लिए जाने की शिकायत, प्रशासन ने कहा- कहीं से नहीं मिला ऐसा निर्देश
झारखंड के गोड्डा जिले के मेहरमा प्रखंड में मुख्यमंत्री Maiyan Samman Scheme के नाम पर बिचौलियों द्वारा महिलाओं से दस्तावेज मांगने और नाम कटने का भय दिखाने का मामला सामने आया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकार की ओर से किसी प्रकार के सत्यापन या दस्तावेज जमा कराने का निर्देश नहीं दिया गया है।
Maiyan Samman Scheme के सत्यापन के नाम पर महिलाओं में बढ़ी चिंता
गोड्डा जिले के मेहरमा प्रखंड में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। योजना के लाभार्थियों के बीच इन दिनों सत्यापन के नाम पर भ्रम और भय का माहौल बन गया है। आरोप है कि कुछ पंचायत प्रतिनिधि और बिचौलिये महिलाओं से विभिन्न दस्तावेज जमा कराने के लिए दबाव बना रहे हैं और नाम सूची से हटाए जाने का डर दिखाकर उनका आर्थिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों से मिल रही शिकायतों के अनुसार, कई पंचायतों में लाभार्थियों को पंचायत भवन बुलाकर उनसे दस्तावेज जमा करने के लिए कहा जा रहा है। इससे योजना से जुड़ी महिलाओं के बीच असमंजस और चिंता का माहौल पैदा हो गया है।
आधार, राशन कार्ड और बैंक दस्तावेज मांगे जाने की शिकायत
कई लाभार्थियों ने बताया कि सत्यापन प्रक्रिया के नाम पर उनसे आधार कार्ड, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, बैंक खाता विवरण और पैन कार्ड की छाया प्रति जमा करने को कहा जा रहा है। कुछ महिलाओं ने आरोप लगाया कि दस्तावेज जमा नहीं करने पर उनका नाम योजना की सूची से हटाए जाने की बात कही जा रही है।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बार-बार दस्तावेज तैयार करना और पंचायत कार्यालयों के चक्कर लगाना परेशानी बढ़ा रहा है। इसके अलावा यह भी डर बना हुआ है कि कहीं सभी कागजात जमा करने के बाद भी उनका नाम लाभार्थी सूची से बाहर न कर दिया जाए।
पंचायत भवनों में उमड़ रही भीड़, बढ़ रही बेचैनी
सत्यापन की चर्चाओं के बीच कई पंचायत भवनों में लाभार्थियों की भारी भीड़ देखी जा रही है। महिलाएं अपने दस्तावेज लेकर पहुंच रही हैं ताकि उनका नाम सूची से न कटे। लेकिन आधिकारिक जानकारी स्पष्ट नहीं होने के कारण भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन की ओर से स्पष्ट सूचना पहले ही दे दी जाती, तो महिलाओं को इस तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।
प्रशासन ने किया साफ – सत्यापन के लिए दस्तावेज जमा करने का निर्देश नहीं
मामले को लेकर मेहरमा प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) अभिनव कुमार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार की ओर से कहीं भी लाभार्थियों के दस्तावेज लेकर सत्यापन करने का निर्देश जारी नहीं किया गया है।
उन्होंने बताया कि पंचायत सचिवों को केवल उन लाभार्थियों की पहचान करने की जिम्मेदारी दी गई है जो योजना की पात्रता से बाहर हो चुके हैं। इसमें ऐसे लोग शामिल हैं जिनकी उम्र निर्धारित सीमा पार कर चुकी है, जिनकी शादी हो चुकी है, जिन्हें सरकारी नौकरी मिल चुकी है या जिनकी मृत्यु हो चुकी है।
बीडीओ ने स्पष्ट कहा कि किसी भी पात्र लाभार्थी का नाम बेवजह नहीं हटाया जाएगा और महिलाओं को अफवाहों से बचने की जरूरत है।
अफवाह और बिचौलियों से सतर्क रहने की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी योजनाओं के नाम पर अक्सर अफवाह और बिचौलियों की सक्रियता बढ़ जाती है। ऐसे में लाभार्थियों को किसी भी जानकारी की पुष्टि पंचायत सचिव, प्रखंड कार्यालय या आधिकारिक माध्यमों से करनी चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति दस्तावेज के बदले पैसे मांगता है या डराकर कागजात मांगता है, तो इसकी शिकायत स्थानीय प्रशासन से करनी चाहिए। इससे न केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी बल्कि वास्तविक लाभार्थियों को भी राहत मिलेगी।
पारदर्शिता और जागरूकता ही समाधान
मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना महिलाओं को आर्थिक संबल देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। लेकिन यदि योजना के नाम पर भय और भ्रम फैलाया जाएगा, तो इसका असर लाभार्थियों पर पड़ेगा। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी बनती है कि सही जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जाए और किसी भी प्रकार के बिचौलिया तंत्र पर सख्ती से कार्रवाई हो।
फिलहाल प्रशासन की ओर से जारी स्पष्टीकरण के बाद उम्मीद की जा रही है कि लाभार्थियों के बीच फैली आशंका दूर होगी और योजना का लाभ सही लोगों तक बिना किसी परेशानी के पहुंचेगा।
