Jharkhand News : ग्रासरूट इनोवेशन इंटर्नशिप स्कीम को मंजूरी, 17 हजार से अधिक छात्रों को गांवों में रिसर्च और काम करने का मिलेगा अवसर
Jharkhand News : झारखंड सरकार ने छात्रों के लिए बड़ी पहल करते हुए ग्रासरूट इनोवेशन इंटर्नशिप स्कीम को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत कॉलेज छात्रों को गांवों में रिसर्च और व्यवहारिक अनुभव के साथ ₹3000 से ₹8000 तक प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाएगा।
झारखंड में युवाओं को शिक्षा के साथ रोजगार और व्यवहारिक अनुभव से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने छात्रों के लिए “ग्रासरूट इनोवेशन इंटर्नशिप स्कीम” को मंजूरी दे दी है। इस योजना का उद्देश्य केवल छात्रों को आर्थिक सहायता प्रदान करना नहीं है, बल्कि उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में काम करने, शोध करने और समाज के साथ जुड़ने का अवसर देना भी है।
राज्य सरकार की इस नई पहल के तहत कॉलेज और उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्र गांवों में जाकर विभिन्न विषयों पर अध्ययन और शोध करेंगे। इस दौरान छात्रों को उनके कार्य और प्रदर्शन के आधार पर ₹3000 से ₹8000 प्रति माह तक स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाएगा। यह योजना उन छात्रों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद मानी जा रही है जो अपनी पढ़ाई के साथ-साथ अनुभव और अतिरिक्त आय प्राप्त करना चाहते हैं।
सरकार की योजना के अनुसार इस वर्ष करीब 17,380 छात्रों का चयन किया जाएगा। चयनित छात्र राज्य की सभी 4345 पंचायतों में जाकर विभिन्न परियोजनाओं पर काम करेंगे। यह कार्यक्रम न केवल छात्रों को नई सीख देगा, बल्कि गांवों में मौजूद स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान को सामने लाने का भी काम करेगा।
इस इंटर्नशिप योजना का मुख्य उद्देश्य छात्रों को किताबों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें जमीनी स्तर पर अनुभव देना है। आज के समय में केवल शैक्षणिक डिग्री ही पर्याप्त नहीं मानी जाती, बल्कि उद्योग और संस्थानों की मांग भी यही रहती है कि छात्रों के पास व्यवहारिक अनुभव और समस्या समाधान की क्षमता हो। ऐसे में यह योजना छात्रों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है।
इंटर्नशिप के दौरान छात्र झारखंड की संस्कृति, लोक कला, पारंपरिक भोजन, संगीत, हस्तशिल्प और स्थानीय नवाचारों पर शोध करेंगे। इसके साथ ही वे ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद विशेषताओं और समस्याओं को समझकर उनसे जुड़े समाधान खोजने का प्रयास भी करेंगे। इससे एक ओर जहां छात्रों को रिसर्च का अनुभव मिलेगा, वहीं दूसरी ओर राज्य की सांस्कृतिक विरासत को भी बेहतर तरीके से दस्तावेजी रूप दिया जा सकेगा।
योजना के तहत छात्रों को चार-चार के समूह में बांटा जाएगा। प्रत्येक समूह की निगरानी एक मेंटर द्वारा की जाएगी, जो उनके कार्यों का मार्गदर्शन करेगा और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र बेहतर तरीके से सीख सकें और उन्हें काम के दौरान किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी योजनाएं छात्रों में नेतृत्व क्षमता और सामाजिक समझ को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं। गांवों में रहकर काम करने से छात्रों को समाज की वास्तविक स्थिति का पता चलेगा और वे अपने ज्ञान को वास्तविक समस्याओं के समाधान में उपयोग कर पाएंगे।
इस योजना को लेकर राज्य की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि यह युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है। उन्होंने कहा कि “सीखो और कमाओ” की सोच को मजबूत करने वाली यह योजना छात्रों को आत्मनिर्भर बनने में मदद करेगी। साथ ही इससे युवा राज्य के विकास में अपनी भागीदारी भी सुनिश्चित कर सकेंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि समाज और राज्य के विकास में सक्रिय भागीदार बनाना है। इस पहल से छात्रों को नई सोच, नए अवसर और बेहतर भविष्य की दिशा मिलेगी।
शिक्षा और रोजगार के बीच की दूरी को कम करने के लिए इस तरह की योजनाएं भविष्य में राज्य के विकास मॉडल को मजबूत कर सकती हैं। यदि यह योजना सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में अधिक संख्या में छात्रों को इससे लाभ मिलने की उम्मीद की जा रही है।
