Jharkhand News : भोजपुरी, मगही और अंगिका को जे-टेट परीक्षा में शामिल करने पर सरकार गंभीर, मंत्री समिति जल्द सौंपेगी रिपोर्ट
Jharkhand News : झारखंड में J-TET 2026 परीक्षा को लेकर क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं पर बहस तेज हो गई है। भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी भाषाओं को परीक्षा में शामिल करने के मुद्दे पर उच्च स्तरीय समिति मंथन कर रही है। अंतिम फैसला मुख्यमंत्री Hemant Soren करेंगे।
झारखंड में होने वाली झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (J-TET) 2026 को लेकर राज्य में भाषा आधारित बहस एक बार फिर तेज हो गई है। क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को परीक्षा में शामिल किए जाने के मुद्दे पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। राज्य सरकार ने इस संवेदनशील विषय पर विभिन्न पक्षों की राय जानने और संतुलित निर्णय लेने के उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय मंत्री समिति का गठन किया है। अब इस मामले में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री Hemant Soren द्वारा लिया जाएगा।
जे-टेट परीक्षा राज्य में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। ऐसे में परीक्षा के नियमों और भाषा व्यवस्था में किसी भी बदलाव का सीधा असर हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है। यही कारण है कि सरकार इस विषय पर जल्दबाजी से बचते हुए सभी पहलुओं का अध्ययन कर रही है।
राज्य के वित्त मंत्री Radha Krishna Kishore ने जानकारी दी कि समिति की दूसरी बैठक में भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी भाषाओं को J-TET परीक्षा में शामिल करने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि समिति की रिपोर्ट एक-दो दिनों में मुख्यमंत्री को सौंप दी जाएगी, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सरकार का कहना है कि झारखंड की क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाएं राज्य की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए इस विषय पर केवल शैक्षणिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी विचार किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि जनजातीय भाषाओं के साथ-साथ अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को भी उचित सम्मान मिले।
जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले जब परीक्षा नियमों में कुछ भाषाओं को शामिल नहीं किया गया था, तब कई जिलों में विरोध प्रदर्शन और असंतोष देखने को मिला था। छात्रों, अभ्यर्थियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने अपनी नाराजगी जताते हुए सरकार से पुनर्विचार की मांग की थी। इसके बाद सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया।
समिति को यह जिम्मेदारी दी गई कि वह विभिन्न जिलों की भाषाई स्थिति, वहां की शिक्षा व्यवस्था और स्थानीय आवश्यकताओं का अध्ययन करे। इसके आधार पर समिति सरकार को अपनी सिफारिश देगी ताकि ऐसा निर्णय लिया जा सके जो अधिकतम छात्रों और अभ्यर्थियों के हित में हो।
सूत्रों के अनुसार समिति की बैठकों में विभिन्न विचार सामने आए हैं। कुछ सदस्यों का मानना है कि भोजपुरी, मगही और अंगिका जैसी भाषाओं को शामिल किया जाना चाहिए ताकि इन भाषाओं से जुड़े अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके। वहीं कुछ सदस्य यह मानते हैं कि जनजातीय भाषाओं को प्राथमिकता देना अधिक आवश्यक है क्योंकि वे झारखंड की मूल सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं।
यही कारण है कि बैठकों में अभी तक पूरी तरह सहमति नहीं बन सकी है। हालांकि सरकार का कहना है कि निर्णय किसी एक पक्ष को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि सभी वर्गों और क्षेत्रों की जरूरतों को समझते हुए लिया जाएगा।
इससे पहले अप्रैल 2026 में राज्य कैबिनेट ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियम-2026 को मंजूरी दी थी। लेकिन नियमों के सामने आने के बाद क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर विवाद शुरू हो गया। इसके बाद सरकार को इस विषय पर दोबारा विचार करना पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय भाषाओं को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ना छात्रों के लिए लाभदायक हो सकता है। इससे न केवल भाषा और संस्कृति को संरक्षण मिलेगा बल्कि ग्रामीण और स्थानीय पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों को भी बेहतर अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले भी कई मंचों से जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने की बात कह चुके हैं। राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था में स्थानीय भाषाओं की भूमिका को मजबूत करने पर लगातार जोर देती रही है। अब राज्यभर के छात्रों, शिक्षकों और अभ्यर्थियों की नजर मुख्यमंत्री के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई है।
यदि सरकार भाषाओं को शामिल करने का निर्णय लेती है तो इसका प्रभाव आने वाली शिक्षक भर्ती प्रक्रिया और हजारों उम्मीदवारों के भविष्य पर देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री का फैसला इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।
