Jharkhand News : आदर्श विद्यालय योजना की अवधि समाप्त होने के बाद 80 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फंड संकट से जूझ रहे हैं। कर्मचारियों को छह माह से वेतन नहीं मिला, जबकि सरकार 100 नए स्कूल खोलने की तैयारी में है।
Jharkhand News : झारखंड की महत्वाकांक्षी आदर्श विद्यालय योजना का भविष्य अनिश्चितता में है। योजना की अवधि समाप्त होने के बाद 80 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में फंड की कमी, कर्मचारियों के वेतन संकट और प्रशासनिक चुनौतियां बढ़ गई हैं। कई स्कूल मैनेजर इस्तीफा दे चुके हैं, जबकि नए स्कूल खोलने की घोषणा पर सवाल उठ रहे हैं।
झारखंड में सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का भविष्य अधर में, वेतन संकट से जूझ रहे कर्मचारी
झारखंड सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई आदर्श विद्यालय योजना आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। योजना की अवधि सितंबर 2025 में समाप्त होने के बाद से अब तक इसके नवीनीकरण को मंजूरी नहीं मिल सकी है। इसका सीधा असर राज्यभर में संचालित 80 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस (School of Excellence) पर पड़ रहा है, जहां फंड की कमी और प्रशासनिक अनिश्चितता के कारण शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
राज्य सरकार ने इन विद्यालयों को सीबीएसई पैटर्न पर विकसित कर बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा था। लेकिन योजना की अवधि समाप्त होने के बाद नियमित वित्तीय सहायता बंद होने से विद्यालयों के समक्ष संचालन संबंधी गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। यदि जल्द कोई निर्णय नहीं लिया गया तो सितंबर 2026 में योजना बंद हुए एक वर्ष पूरा हो जाएगा, जबकि स्कूलों का भविष्य अब भी अनिश्चित बना रहेगा।
फंड की कमी से प्रभावित हो रही शैक्षणिक गतिविधियां
सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस सीबीएसई से संबद्ध विद्यालय हैं। ऐसे में यहां समय पर परीक्षाओं का आयोजन, पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता, प्रयोगशालाओं का संचालन और अन्य शैक्षणिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करना आवश्यक है। लेकिन नियमित फंड नहीं मिलने के कारण इन कार्यों को संचालित करने में लगातार कठिनाइयां सामने आ रही हैं।
हाल ही में नौवीं और 11वीं कक्षा के विद्यार्थियों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने में भी बड़ी परेशानी हुई। विद्यालयों के पास भुगतान के लिए पर्याप्त राशि नहीं थी, जिसके कारण पुस्तक आपूर्ति प्रभावित होने लगी। बाद में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) ने दूसरे मद से करीब 1.20 करोड़ रुपये का भुगतान कर पुस्तक आपूर्तिकर्ता को राशि उपलब्ध कराई, तब जाकर विद्यार्थियों को किताबें मिल सकीं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में विद्यालयों की गुणवत्ता और छात्रों की पढ़ाई पर व्यापक असर पड़ सकता है।
छह महीने से वेतन नहीं मिलने से बढ़ी कर्मचारियों की परेशानी
फंड संकट का सबसे अधिक असर इन विद्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों पर पड़ा है। जानकारी के अनुसार राज्य के 80 सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में कार्यरत लगभग 30 स्कूल मैनेजर, 240 अन्य कर्मचारी और तीन राज्य स्तरीय पीएमयू अधिकारी पिछले करीब छह महीनों से वेतन का इंतजार कर रहे हैं।
वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। कई कर्मचारियों का कहना है कि लगातार महीनों तक वेतन नहीं मिलने से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, घर का किराया, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करना चुनौती बन गया है।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई जिलों में कार्यरत स्कूल मैनेजरों ने नौकरी छोड़ना शुरू कर दिया है। हजारीबाग, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, बोकारो और गोड्डा समेत कई जिलों के मैनेजर इस्तीफा दे चुके हैं। वहीं कई अन्य कर्मचारी भी वैकल्पिक रोजगार की तलाश में हैं।
नए स्कूलों की घोषणा पर उठ रहे सवाल
वर्तमान संकट के बीच राज्य सरकार द्वारा 100 नए सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस शुरू करने की घोषणा ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि सरकार एक ओर नए विद्यालय खोलने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर पहले से संचालित 80 विद्यालयों के लिए योजना का नवीनीकरण तक नहीं हो पाया है।
उनका तर्क है कि पहले मौजूदा विद्यालयों की वित्तीय और प्रशासनिक समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए, ताकि छात्रों और कर्मचारियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। इसके बाद ही नए विद्यालयों के विस्तार पर विचार किया जाना चाहिए।
कैबिनेट मंजूरी के इंतजार में योजना
सूत्रों के अनुसार आदर्श विद्यालय योजना को आगे बढ़ाने के लिए कैबिनेट की मंजूरी आवश्यक है। इसके लिए प्रस्ताव को विभिन्न विभागीय स्तरों से स्वीकृति मिलने के बाद मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में अभी कई महीने और लग सकते हैं।
जब तक योजना के नवीनीकरण पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक विद्यालयों के सामने वित्तीय संकट बना रहने की आशंका है। इसका असर न केवल कर्मचारियों बल्कि हजारों विद्यार्थियों की शिक्षा पर भी पड़ सकता है।
शिक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती
सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस को झारखंड में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मॉडल के रूप में विकसित किया गया था। इन विद्यालयों से हजारों छात्र-छात्राएं बेहतर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। लेकिन वर्तमान वित्तीय संकट ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है।
अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और कैबिनेट के फैसले पर टिकी हैं। यदि जल्द योजना को मंजूरी नहीं मिलती है, तो कर्मचारियों के पलायन, संसाधनों की कमी और शैक्षणिक गतिविधियों में बाधा जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं। ऐसे में सरकार के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह जल्द निर्णय लेकर शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता सुनिश्चित करे।
