Saraikela POCSO Case : प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सुनाया बड़ा फैसला, पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार
Saraikela POCSO Case : सरायकेला में नाबालिग के साथ शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपी सिद्धार्थ किस्कू को 25 वर्ष सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई है। पीड़िता को लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला।
Saraikela POCSO Case : झारखंड के Saraikela से एक अहम मामला सामने आया है, जहां पॉक्सो एक्ट के तहत सुनवाई करते हुए अदालत ने शादी का झांसा देकर नाबालिग के साथ शारीरिक संबंध बनाने वाले आरोपी को कड़ी सजा सुनाई है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश रमाशंकर सिंह की अदालत ने आरोपी सिद्धार्थ किस्कू को दोषी करार देते हुए 25 वर्ष सश्रम कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने की स्थिति में दोषी को चार महीने की अतिरिक्त जेल की सजा भुगतनी होगी।
अदालत ने यह फैसला पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत सुनाया। यह मामला सरायकेला महिला थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। इस मामले में पीड़िता के पिता ने आरोपी सिद्धार्थ किस्कू के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। लंबे समय तक चली सुनवाई और गवाहों के बयान के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए यह सख्त फैसला सुनाया।
क्या था पूरा मामला
जानकारी के अनुसार यह घटना 15 दिसंबर 2024 की है। पीड़िता के पिता ने 21 दिसंबर 2024 को सरायकेला महिला थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। दर्ज आवेदन में बताया गया कि घटना वाले दिन सुबह करीब 3 बजे आरोपी सिद्धार्थ किस्कू ने नाबालिग लड़की को फोन कर घर से बाहर बुलाया। इसके बाद वह उसे अपनी स्कूटी पर बैठाकर दशमी पूजा देखने के बहाने डुबुलडीह गांव लेकर गया।
वहां आरोपी पीड़िता के साथ डांस करने लगा। कुछ समय बाद जब पीड़िता ने घर लौटने की बात कही तो आरोपी ने कहा कि गांव के रास्ते से जाने पर लोग देख लेंगे, इसलिए दूसरे रास्ते से चलेंगे। आरोप है कि इसी दौरान आरोपी पीड़िता को डोबोडीह के पास सुनसान जगह पर ले गया और उसके साथ जबरदस्ती करने लगा।
जब पीड़िता ने विरोध किया तो आरोपी ने उससे शादी करने का झांसा दिया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया। घटना के बाद आरोपी पीड़िता को गम्हरिया बस स्टैंड के पास छोड़कर फरार हो गया। बाद में जब परिजनों ने पीड़िता से संपर्क किया तो उसने खुद के गम्हरिया में होने की जानकारी दी। इसके बाद परिवार वालों ने उसे वापस घर बुलाया।
चार दिन बाद परिजनों को बताई पूरी घटना
घटना के चार दिन बाद 21 दिसंबर को पीड़िता ने अपने परिवार को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद पीड़िता के पिता ने सरायकेला महिला थाना पहुंचकर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कराया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आवश्यक साक्ष्य जुटाने के बाद आरोपी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की।
सुनवाई के दौरान अदालत में मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और अन्य सबूत पेश किए गए। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आरोपी को दोषी पाया और कठोर सजा सुनाई।
पीड़िता को मिला न्याय
इस फैसले को पीड़िता और उसके परिवार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। लंबे इंतजार और कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार पीड़िता को न्याय मिला। अदालत के इस फैसले को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पॉक्सो एक्ट बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों को रोकने के लिए बनाया गया है और ऐसे मामलों में त्वरित एवं सख्त कार्रवाई जरूरी है। सरायकेला अदालत का यह फैसला समाज में यह संदेश देता है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों को कानून किसी भी हाल में बख्शने वाला नहीं है।
