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रांची के अस्पतालों और मैदानों में नशेड़ियों का कब्जा सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

राजधानी रांची में सार्वजनिक स्थलों और अस्पताल परिसरों में नशेड़ियों का बढ़ता जमावड़ा गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है शुक्रवार को जब शाम के बाद पड़ताल की गई तो पाया गया कि सदर अस्पताल परिसर में शाम 6 बजे बाद से ही सुनसान जगहों पर कई नशेड़ी धड़ल्ले से नशापान कर रहे हैं लेकिन उन्हें रोकने वाला कोई नहीं दिखा

रात ढलते ही सदर अस्पताल परिसर में युवक-युवतियां दीवारों और बंद गेटों को तोड़कर अंदर जाती हैं, जो सबसे चिंताजनक है। इस दौरान उनके गिरने की भी कई घटनाएं हुई हैं

परिसर में घुसते ही स्ट्रीट लाइट तोड़ दी जाती है और विरोध करने पर गार्ड को खदेड़ दिया जाता है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। रात 11 बजे तक ये नशेड़ी यहां पर अड्डा बनाकर रह रहे हैं

दूसरी ओर कोकर क्षेत्र में पुलिस की गश्ती न के बराबर है, यह रात 9 बजे से ही सड़क किनारे ही नशापान होते देखा गया। वहीं, लोवाडीह स्थित हाईटेंशन मैदान में भी हर शाम सात बजे के बाद नशेड़ियों की भीड़ जुटने लगती है

रात बढ़ने के साथ यहां खुलेआम शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन किया जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि यहां लड़कों के साथ-साथ लड़कियां भी बड़ी संख्या में पहुंच रही हैं, जिससे क्षेत्र का माहौल लगातार बिगड़ रहा है

रात 10 बजे, डीआईजी मैदान और ओटीसी मैदान भी रिम्स परिसर में नशेड़ियों के अड्डे में बदल गए हैं। रिम्स जैसे संवेदनशील अस्पताल परिसरों में भी नशापान की घटनाएं हो रही हैं, जो मरीजों और उनके परिवारों को मुसीबत में डाल रही हैं

स्थानीय लोगों का आरोप है कि रात के समय पुलिस गश्त न के बराबर होती है, जिससे नशेड़ियों के हौसले बुलंद हैं। खुलेआम नशापान के कारण युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। शहर में बढ़ती इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है

रांची जैसे तेजी से बढ़ते शहर में सार्वजनिक स्थानों को इस तरह नशेड़ियों के पास जाना कानून-व्यवस्था और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है

विशेषज्ञों का मानना है कि युवा नशे की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं क्योंकि वे बेरोजगारी, गलत संगत, आसानी से उपलब्धता और पर्याप्त निगरानी नहीं पाते हैं। राजधानी होने के कारण रांची में बहुत से शिक्षण और चिकित्सा संस्थान हैं, लेकिन इनके आसपास की गतिविधियां चिंता का विषय हैं

यदि समय रहते कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका प्रभाव आने वाली पीढ़ी पर पड़ेगा। स्थानीय प्रशासन, पुलिस और नगर निगम को संयुक्त रूप से संवेदनशील स्थानों की पहचान कर नियमित गश्त, सीसीटीवी निगरानी और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी

साथ ही स्कूल-कालेज स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से अवगत कराना भी जरूरी है, ताकि शहर का सामाजिक माहौल सुरक्षित और स्वस्थ बना रह सके

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घा सिन्हा एक समर्पित और प्रतिभाशाली कंटेंट राइटर, वेबसाइट अपडेटर और डिजिटल हैंडलर हैं, जो बीते कई वर्षों से न्यूज़ और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। वे विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर गहराई से शोध कर सटीक, संतुलित और प्रभावी लेखन प्रस्तुत करती हैं। उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और पाठकों को सहज रूप से जोड़ने वाली है, जिससे जटिल खबरें भी आसानी से समझी जा सकती हैं। इसके साथ ही मेघा वेबसाइट मैनेजमेंट, कंटेंट अपडेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म हैंडलिंग में भी दक्ष हैं। वे नियमित रूप से वेबसाइट को अपडेट रखने, खबरों को समय पर प्रकाशित करने और कंटेंट की गुणवत्ता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनकी मेहनत, लगन और प्रोफेशनल अप्रोच ने उन्हें एक भरोसेमंद और प्रभावशाली मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है, जो समाज में जागरूकता फैलाने के लिए निरंतर कार्यरत हैं।
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