Jharkhand News: बरकाकाना में राम नवमी के अवसर पर पिछले 51 वर्षों से भव्य जुलूस आयोजित करने की परंपरा चली आ रही है। इस अवसर पर हजारों राम भक्त भगवा झंडे लेकर उत्साह और श्रद्धा के साथ निकलते हैं। स्थानीय लोग इसे गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक मानते हैं, जहां विभिन्न धर्मों और संप्रदायों के लोग आपस में भाईचारा दिखाते हैं। पिरी तेलियातू, बरकाकाना, CIC बस्ती (लाइन पार) और आसपास के क्षेत्रों से निकलने वाले जुलूस विभिन्न मार्गों से होते हुए बरकाकाना स्टेशन चौक में मिलते हैं। यहाँ प्रतिभागी पारंपरिक हथियारों का उपयोग करते हुए अपनी कलात्मक और शौर्य कौशल का प्रदर्शन करते हैं।
मुस्लिम समुदाय का सहयोग और Martial Arts प्रदर्शन
इस जुलूस में मुस्लिम समुदाय के सदस्य भी राम भक्तों की सेवा में पूरी तरह लगे रहते हैं। वे पानी, शरबत, भुने चने, गुड़ और अन्य जलपान सामग्री वितरित करते हैं। इसके अलावा, मुस्लिम भाइयों द्वारा खुद Martial Arts में भाग लिया जाता है, जिसमें वे अद्भुत कौशल का प्रदर्शन करते हैं। इस सहभागिता से समाज में आपसी भाईचारा, प्रेम और सद्भाव और मजबूत होता है। स्थानीय लोग बताते हैं कि मुस्लिम और हिंदू समुदाय के लोग मिलकर इस आयोजन को सफलता की ऊँचाई तक पहुँचाते हैं, और यह सहयोग बरकाकाना की सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है।
राजनीति और सामाजिक सौहार्द का संघर्ष
स्थानीय लोग मानते हैं कि कुछ राजनीतिक तत्व हमेशा समाज में विवाद और फूट डालने की कोशिश करते हैं। वे अलग-अलग माध्यमों से समाज में तनाव और असहमति फैलाने का प्रयास करते हैं। बावजूद इसके, बरकाकाना के लोग हमेशा एकजुट रहे हैं और एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। यही कारण है कि राम नवमी जैसे आयोजनों में लोगों का सहयोग और भाईचारा बिना किसी बाधा के दिखाई देता है। समाज के लोग शिक्षा और जागरूकता के कारण अब सही और गलत का फर्क समझते हैं और छोटी-मोटी अनबन को शांति और सहयोग के साथ सुलझा पाते हैं।
सामाजिक संदेश और भाईचारे का महत्व
सामाजिक कार्यकर्ता गोपाल शरण राय ने कहा कि अब के समय में लोग अधिक शिक्षित और जागरूक हैं। वे बिना किसी दबाव के आपसी सहयोग और समझदारी से समाज में शांति बनाए रखते हैं। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता महमूद हसन ने सभी से अपील की कि वे एक-दूसरे के धर्म और संप्रदाय का सम्मान करें और संविधान का पालन करें। उन्होंने कहा कि समाज में विवाद और दुश्मनी फैलाने से कुछ भी लाभ नहीं होता, बल्कि इससे केवल अशांति बढ़ती है। बरकाकाना की यह गंगा-जमुनी तहज़ीब सबके लिए एक प्रेरणा है और आने वाले समय में भी इस भाईचारे की भावना कायम रहेगी।
