Jharkhand News: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में 17 मार्च को सुवर्णरेखा नदी के तट पर पाए गए 227 किलो वजन वाले अमेरिकी बम को नौ दिन बीत जाने के बाद भी डिफ्यूज नहीं किया जा सका है। बहरागोड़ा थाना क्षेत्र के पानीपड़ा-नागुड़साई इलाके में मिला यह बम जिंदा अवस्था में पाया गया था। सेना की बम निरोधक दस्ता टीम ने बम की वैज्ञानिक जांच की और सुरक्षा के दृष्टिकोण से ड्रोन कैमरे के माध्यम से आसपास के रिहायशी इलाकों की स्थिति का मूल्यांकन किया। फिलहाल सेना इसे ‘बंकर तकनीक’ का उपयोग करके निष्क्रिय करने की तैयारी कर रही है।
बंकर तकनीक से सुरक्षित डिफ्यूजन
सेना द्वारा अपनाई जाने वाली बंकर तकनीक के तहत बम के चारों ओर बालू से भरी बोरियों की ऊंची दीवार खड़ी की जाएगी और जमीन में विशेष गड्ढा तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य विस्फोट होने पर दबाव को जमीन के भीतर ही रोकना और आसपास के लोगों तथा संपत्ति को नुकसान से बचाना है। 227 किलो के विशाल बम को निष्क्रिय करने के दौरान होने वाले कंपन और मलबे को रोकने के लिए यह तकनीक बेहद प्रभावी मानी जाती है। सेना की टीम के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं है।
इलाके की सुरक्षा और खाली कराए गए गांव
सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए बम निष्क्रिय करने के दौरान लगभग 1 किलोमीटर के दायरे में आने वाले रिहायशी क्षेत्र, विशेषकर पानीपड़ा गांव के लोगों को खाली कर दिया गया है। प्रशासन ने वहां के लोगों को कई जरूरी हिदायतें भी दी हैं। इसके अलावा हेलीकॉप्टर और अन्य विमानों का परिचालन बम निष्क्रिय होने तक प्रतिबंधित रखा गया है। सेना पूरे इलाके को नियंत्रण में रखकर बम निष्क्रिय अभियान को सुरक्षित तरीके से अंजाम दे रही है।
अमेरिकी मॉडल का बम और संभावित अन्य विस्फोटक
माना जा रहा है कि यह बम द्वितीय विश्व युद्ध का अमेरिकी मॉडल है। यह समय के साथ बालू और मिट्टी के नीचे दब गया था, लेकिन खुदाई के दौरान बाहर आ गया। सेना को इलाके में एक और बम होने का संकेत भी मिला है। स्थानीय लोग दावा कर रहे हैं कि इस क्षेत्र में कई और बम जमीन के नीचे दबे हो सकते हैं। ड्रोन सर्वे और मेटल डिटेक्टर की मदद से सेना पूरे इलाके में तलाशी अभियान चला रही है ताकि किसी अप्रत्याशित दुर्घटना से बचा जा सके।
