Jharkhand: आधी फरवरी बीत चुकी है और देश के कई राज्यों में 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं। बोर्ड की परीक्षाओं में निगरानी बेहद कड़ी होती है। हर क्लास में दो-दो टीचर तैनात रहते हैं और छात्रों की एंट्री से पहले सुरक्षा जांच होती है। आमतौर पर इस कड़ी निगरानी का उद्देश्य सिर्फ यह सुनिश्चित करना होता है कि कोई भी छात्र नकल न कर सके। लेकिन झारखंड के गढ़वा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सभी को चौंका दिया।
एक छात्र और पूरे सेंटर की तैनाती, परीक्षा या युद्ध की तैयारी?
गढ़वा में मैट्रिक परीक्षा के दौरान एक ऐसा सेंटर सामने आया जहां सिर्फ एक छात्र के लिए पूरा सिस्टम तैनात किया गया। शंकर कुमार सिंह नामक छात्र ने संगीत विषय चुना था और वह उस विषय का इकलौता परीक्षार्थी था। आमतौर पर एक छात्र के लिए इतना व्यापक इंतजाम नहीं किया जाता, लेकिन यहां मामला अलग था। यह आयोजन उत्क्रमित मध्य विद्यालय में हुआ, जहां सामान्य परीक्षा के दौरान 406 छात्र शामिल थे, लेकिन संगीत की परीक्षा देने वाला शंकर ही एकमात्र छात्र था।
निगरानी का जंग जैसा माहौल
शंकर कुमार की परीक्षा के दौरान सेंटर पर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी थी। यहां मजिस्ट्रेट, 18 निगरानी दल और 12 पुलिसकर्मी तैनात थे। इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि परीक्षा पूरी ईमानदारी और शांति के साथ संपन्न हो। एक छात्र के लिए इतनी तैनाती देखकर लोग हैरान रह गए। आमतौर पर बोर्ड परीक्षा के दौरान भी ज्यादा छात्र होने पर ही इतनी सुरक्षा होती है, लेकिन यहां सिर्फ एक छात्र के लिए पूरा जाल बिछाया गया।
छात्र और शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा
यह अनोखा मामला शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा की गंभीरता पर भी सवाल खड़े करता है। एक तरफ यह दिखाता है कि बोर्ड परीक्षा को कितना गंभीरता से लिया जाता है, वहीं दूसरी तरफ यह चर्चा का विषय है कि क्या केवल एक छात्र के लिए इतने संसाधन तैनात करना आवश्यक था। यह मामला न केवल गढ़वा जिले बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। लोगों के लिए यह देखकर आश्चर्यजनक है कि परीक्षा में ईमानदारी बनाए रखने के लिए कितनी कड़ी निगरानी संभव है।

