Jharkhand: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना मुर्मू सोरेन के साथ दावोस से देर रात लंदन पहुंचे। उनके साथ प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। लंदन पहुंचते ही वहां रह रहे झारखंडी छात्रों और प्रवासी समुदाय के लोगों ने मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह स्वागत औपचारिक कम और भावनात्मक अधिक था। दूर देश में भी झारखंड की मिट्टी की खुशबू और अपनेपन का एहसास साफ नजर आया। पारंपरिक पहनावे में सजे झारखंडी समाज के लोग अपने मुख्यमंत्री को देखकर उत्साहित दिखे और पूरे माहौल में गर्व और आत्मीयता की भावना महसूस की गई।
मुख्यमंत्री के स्वागत में पारंपरिक आदिवासी गीत संगीत और नृत्य की सुंदर प्रस्तुति दी गई। ढोल मांदर और अन्य वाद्य यंत्रों की थाप पर झारखंड की लोक संस्कृति जीवंत हो उठी। पारंपरिक लोक गीतों ने यह संदेश दिया कि भले ही लोग हजारों किलोमीटर दूर रहते हों लेकिन उनकी जड़ें आज भी झारखंड से जुड़ी हुई हैं। यह दृश्य किसी उत्सव से कम नहीं था। झारखंडी समाज ने यह साबित कर दिया कि उनकी पहचान और संस्कृति समय और दूरी से परे है। इस सांस्कृतिक स्वागत ने लंदन की धरती पर भी झारखंड की आत्मा को महसूस करा दिया।
झारखंडी समाज के इस स्नेहपूर्ण स्वागत से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि देर रात लंदन पहुंचने पर अपने लोगों से मिला यह सम्मान उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने कहा कि इस अपनत्व और प्रेम के सामने वे शब्दों में अपनी भावना व्यक्त नहीं कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेश में रहकर भी झारखंड का नाम रोशन कर रहे अपने लोगों को देखकर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने सभी का दिल से धन्यवाद किया और झारखंडी जोहार कहकर अपने संबोधन को समाप्त किया। मुख्यमंत्री की बातों में अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव साफ झलक रहा था।
इस अवसर पर कल्पना मुर्मू सोरेन ने भी झारखंडी समाज का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लंदन जैसी दूर जगह पर इतनी आत्मीयता और सम्मान मिलना हमेशा याद रहेगा। उन्होंने कहा कि झारखंडी समाज का यह प्यार और अपनापन उनके लिए प्रेरणादायक है। इस दौरान कई प्रवासी झारखंडी अपने मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी से मिलकर भावुक हो गए। बातचीत गीत संगीत और मुस्कान के बीच यह साफ दिखा कि झारखंड से दूर रहते हुए भी लोगों का दिल अपने राज्य के लिए धड़कता है। यह स्वागत समारोह झारखंडी पहचान एकता और सांस्कृतिक गौरव का मजबूत प्रतीक बनकर सामने आया।

