Jharkhand News: झारखंड के गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के रोड हरलाडीह गांव से एक बेहद दुखद और भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। गांव के 55 वर्षीय चारो बाश्के ने जीवन के भारी तनाव और कष्टों से जूझते हुए फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। यह घटना पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ा गई है और स्थानीय लोग इस अपूरणीय क्षति से स्तब्ध हैं। चारो बाश्के के परिवार पर दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा है क्योंकि उन्होंने अपने बेटे के लिए जो प्यार और उम्मीदें थीं, वे सब अचानक टूट गईं।
परिजनों के अनुसार, चारो बाश्के का बेटा बबलू बाश्के तीन दिन पहले एक सड़क हादसे का शिकार हुआ था। हादसे में बबलू गंभीर रूप से घायल हो गया था और उसे तुरंत धनबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि बबलू की हालत नाजुक है और वह कोमा में है। बेटे की इस गंभीर हालत ने परिवार के सदस्यों का मनोबल तोड़ दिया था। आर्थिक तंगी के बीच बबलू के इलाज का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा था, जिससे परिवार पर भारी दबाव पड़ा। चारो बाश्के इलाज के लिए धन जुटाने की कोशिश में लगे थे लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि जरूरी रकम जुटाना उनके लिए लगभग नामुमकिन हो गया।
बबलू के इलाज का बढ़ता खर्च और उसकी खराब होती सेहत चारो बाश्के के लिए एक भारी मानसिक बोझ बन गया। आर्थिक संकट और बेटे के लिए चिंता ने उनके मन को इस हद तक तोड़ दिया कि वे इस बुरे दौर को सहन नहीं कर पाए। इसी मानसिक तनाव में आकर उन्होंने यह कठोर और दुखद कदम उठाया। सुबह जब परिवार और गांव के लोग चारो बाश्के को फंदे पर लटका देखे, तो पूरा गांव सकते में आ गया। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है और शव को पोस्टमार्टम के लिए गिरिडीह सदर अस्पताल भेज दिया है। पुलिस अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं और आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
यह दुखद घटना झारखंड के ग्रामीण इलाकों में गरीब परिवारों की दशा पर कई गंभीर सवाल खड़े करती है। इलाज के बढ़ते खर्च और आर्थिक तंगी के बीच गरीब परिवारों के लिए जीवन एक संघर्ष बन जाता है। कई बार ऐसी घटनाएं मनोवैज्ञानिक दबाव और आर्थिक अभाव के चलते होती हैं, जो सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की जरूरत को दर्शाती हैं। स्थानीय लोग अभी भी इस सदमे से उबर नहीं पाए हैं और चारो बाश्के के निधन से उनकी आंखें नम हैं। इस घटना ने इस बात को उजागर किया है कि आर्थिक मदद और बेहतर स्वास्थ्य सेवा की जरूरत कितनी जरूरी है, ताकि ऐसे परिवारों को अपने दुखों से जूझना न पड़े और उन्हें जीवन की मुश्किलों से लड़ने का साहस मिल सके।

