Jharkhand News: पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस से दो लोगों की मौत के बाद झारखंड सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने झारखंड के सभी जिलों के सिविल सर्जनों को सख्त निर्देश जारी करते हुए हाई अलर्ट पर रहने को कहा है। इसके बाद राजधानी रांची में एहतियात के तौर पर सरकारी अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड तैयार कर दिए गए हैं। रांची के सदर अस्पताल में निपाह वायरस के संदिग्ध मरीजों के लिए 20 बेड का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है जहां ऑक्सीजन की पूरी व्यवस्था मौजूद है। वहीं रिम्स अस्पताल में भी 22 आइसोलेशन बेड तैयार रखे गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने आम लोगों से घबराने की बजाय सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि निपाह वायरस जरूर खतरनाक है लेकिन सावधानी और मजबूत इम्युनिटी के जरिए इससे बचाव संभव है। स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड तैयार कर दिए हैं जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की गई है और ऑक्सीजन सप्लाई सुनिश्चित की गई है। लोगों को सलाह दी गई है कि बाहर का खाना खाने से बचें और घर का ताजा भोजन ही करें। फल खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह धोना बेहद जरूरी है। खास तौर पर इस समय खजूर खाने से परहेज करने की सलाह दी गई है क्योंकि यह वायरस मुख्य रूप से फल खाने वाले चमगादड़ों से फैलता है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सावधानी ही इस बीमारी से बचने का सबसे बड़ा हथियार है।
निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण आम वायरल संक्रमण जैसे ही होते हैं लेकिन कुछ खास संकेत चिंता बढ़ा देते हैं। तेज बुखार आना और असहनीय सिरदर्द होना इसके प्रमुख लक्षण हैं जो दिमाग पर असर के कारण होते हैं। इसके अलावा मांसपेशियों में दर्द सांस लेने में तकलीफ गले में खराश और खांसी भी देखी जा सकती है। बीमारी बढ़ने पर दिमाग में सूजन जिसे एन्सेफेलाइटिस कहा जाता है ब्रेन अटैक या कोमा जैसी गंभीर स्थिति भी हो सकती है। सिविल सर्जन ने स्पष्ट कहा कि अगर किसी को तेज सिरदर्द और सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत जांच करानी चाहिए। समय पर जांच और इलाज से जान बचाई जा सकती है। इसलिए लक्षणों को हल्के में लेने की भूल बिल्कुल न करें।
डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि निपाह वायरस फल खाने वाले चमगादड़ों के मूत्र या लार से फैलता है जो फलों को संक्रमित कर देता है। इसके अलावा सूअर घोड़े कुत्ते और बिल्ली जैसे जानवरों से भी संक्रमण का खतरा रहता है। यह वायरस खांसने और छींकने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है। बचाव के लिए मास्क का इस्तेमाल सामाजिक दूरी और साफ सफाई बेहद जरूरी है। इस बीमारी का कोई खास इलाज नहीं है बल्कि कोविड की तरह सपोर्टिव ट्रीटमेंट दिया जाता है जिसमें ऑक्सीजन थेरेपी और दिमाग की सूजन का इलाज शामिल है। जांच के लिए आरटी पीसीआर टेस्ट किया जाता है। रिम्स के माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. मनोज ने कहा कि इस वायरस का सबसे बेहतर इलाज रोकथाम है। मजबूत इम्युनिटी ही इसकी सबसे बड़ी ढाल है। पौष्टिक भोजन और घर का खाना खाकर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाना बेहद जरूरी है।
