बिहार सरकार की नई खनिज परिवहन व्यवस्था लागू, झारखंड के पाकुड़, साहिबगंज और संताल परगना के पत्थर कारोबारियों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
बिहार सरकार ने 10 जून से अन्य राज्यों से आने वाले बालू, पत्थर, गिट्टी और अन्य लघु खनिजों के परिवहन के लिए इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (ISTP) अनिवार्य कर दिया है। नई व्यवस्था से झारखंड के पत्थर कारोबारियों की लागत बढ़ने की आशंका है, जिसका असर बाजार में पत्थर और गिट्टी की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
बिहार में महंगा होगा झारखंड का पत्थर: 10 जून से इंटर स्टेट ट्रांजिट पास अनिवार्य
झारखंड से बिहार भेजे जाने वाले पत्थर और गिट्टी की कीमतों में जल्द ही बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। बिहार सरकार ने राज्य में प्रवेश करने वाले बालू, पत्थर, गिट्टी तथा अन्य लघु खनिजों के परिवहन को नियंत्रित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से 10 जून 2026 से इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (ISTP) व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के तहत अन्य राज्यों से आने वाले प्रत्येक खनिज वाहन के लिए इंटर स्टेट ट्रांजिट पास लेना अनिवार्य होगा।
बिहार सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, राज्य में प्रवेश करने वाले सभी खनिज वाहनों का ऑनलाइन पंजीकरण कराया जाएगा। वाहन मालिकों और कारोबारियों को निर्धारित पोर्टल पर आवेदन कर ट्रांजिट पास प्राप्त करना होगा। बिना वैध आईएसटीपी के बिहार में प्रवेश करने वाले वाहनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है तथा जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
परिवहन लागत बढ़ने की आशंका
नई व्यवस्था लागू होने के बाद खनिज परिवहन की लागत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। कारोबारियों का मानना है कि अतिरिक्त शुल्क और नई औपचारिकताओं के कारण परिवहन खर्च में वृद्धि होगी। इसका सीधा असर बाजार में पत्थर और गिट्टी की कीमतों पर पड़ सकता है।
खान एवं भूतत्व विभाग ने ट्रांजिट पास के लिए शुल्क भी निर्धारित कर दिया है। यदि परिवहन चालान में खनिज की मात्रा वजन के आधार पर दर्ज है तो 60 रुपये प्रति मीट्रिक टन शुल्क देना होगा। वहीं, आयतन के आधार पर दर्ज खनिजों पर 85 रुपये प्रति घनमीटर की दर से शुल्क निर्धारित किया गया है।
झारखंड के पत्थर उद्योग पर सबसे अधिक असर
इस निर्णय का सबसे अधिक प्रभाव झारखंड के पाकुड़, साहिबगंज और संताल परगना क्षेत्र के पत्थर उद्योग पर पड़ने की संभावना है। इन इलाकों से बड़ी मात्रा में पत्थर और गिट्टी बिहार के विभिन्न जिलों में भेजी जाती है। बिहार इन क्षेत्रों के पत्थर कारोबार के लिए एक बड़ा बाजार माना जाता है।
कारोबारियों का कहना है कि पहले से ही परिवहन लागत, डीजल कीमतों और अन्य खर्चों में वृद्धि के कारण व्यवसाय प्रभावित है। अब नए ट्रांजिट शुल्क से लागत और बढ़ेगी, जिससे कारोबारियों के साथ-साथ उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ेगा।
जिला प्रशासन ने जारी की सूचना
नई व्यवस्था को लेकर बांका जिला प्रशासन ने झारखंड के सीमावर्ती जिलों, विशेषकर पाकुड़ सहित अन्य जिलों के जिला खनन पदाधिकारियों को पत्र भेजा है। पत्र में अनुरोध किया गया है कि इस नई व्यवस्था की जानकारी पत्थर कारोबारियों तक पहुंचाई जाए ताकि वे समय रहते आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर सकें।
प्रशासन का मानना है कि जागरूकता के अभाव में कई कारोबारी बिना ट्रांजिट पास के बिहार में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
विक्रमशिला सेतु संकट के बीच नई चुनौती
संताल परगना क्षेत्र के पत्थर कारोबारियों के लिए यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वे पहले से ही विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के कारण कारोबार में भारी गिरावट झेल रहे हैं। भागलपुर स्थित विक्रमशिला सेतु पर यातायात प्रभावित होने के कारण माल परिवहन की प्रक्रिया कठिन हो गई है।
कारोबारियों का दावा है कि सेतु की समस्या के कारण उनके व्यवसाय पर करीब 70 प्रतिशत तक असर पड़ा है। अब नई आईएसटीपी व्यवस्था लागू होने से आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है। उनका कहना है कि अतिरिक्त शुल्क, ऑनलाइन प्रक्रिया और प्रशासनिक औपचारिकताओं के कारण परिवहन महंगा होगा, जिससे कारोबार की प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित हो सकती है।
वैध कारोबार पर पड़ेगा असर
पत्थर उद्योग से जुड़े कई व्यापारियों का मानना है कि नई व्यवस्था का असर मुख्य रूप से वैध कारोबार करने वालों पर पड़ेगा। उनका कहना है कि परिवहन लागत बढ़ने से बाजार में कीमतें बढ़ेंगी और इसका लाभ अवैध कारोबारियों को मिल सकता है।
हालांकि बिहार सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य खनिज परिवहन को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और निगरानी योग्य बनाना है। इससे अवैध खनन और अवैध परिवहन पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी तथा सरकार को राजस्व संग्रह में भी लाभ होगा।
कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परिवहन लागत में वृद्धि होती है तो इसका असर निर्माण कार्यों पर भी दिखाई दे सकता है। बिहार में भवन निर्माण, सड़क निर्माण और अन्य विकास परियोजनाओं में बड़ी मात्रा में झारखंड के पत्थर और गिट्टी का उपयोग होता है। ऐसे में लागत बढ़ने से निर्माण सामग्री महंगी हो सकती है।
10 जून से लागू होने वाली इस नई व्यवस्था पर अब झारखंड के पत्थर कारोबारियों और परिवहन व्यवसायियों की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि नई नीति से बाजार और कारोबार पर कितना प्रभाव पड़ता है।
