Jharkhand News: रांची विश्वविद्यालय के एक्टिंग रजिस्ट्रार डॉ. गुरुचरण साहू को एक बार फिर एक साल के लिए सेवा विस्तार दिया गया है। यह खबर विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि डॉ. साहू 6 फरवरी को अपना साठवां जन्मदिन मनाएंगे। विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार प्रशासनिक पदों पर अधिकतम उम्र सीमा साठ वर्ष है। इसी वजह से सवाल उठने लगे हैं कि क्या वे केवल तीन सप्ताह ही इस पद पर रहेंगे या फिर इस विस्तार के चलते ज्यादा समय तक काम करेंगे। इससे पहले डॉ. विनोद नारायण और डॉ. मुकुंद चंद्र मेहता को भी साठ वर्ष की आयु पूरी होने पर एक्टिंग रजिस्ट्रार पद से हटाकर उनके विभागों में भेज दिया गया था।
डॉ. साहू को हाल ही में सरकार से एक साल के लिए विस्तार मिला है, जबकि वे फरवरी में साठ वर्ष के हो जाएंगे। इस कारण विश्वविद्यालय में यह चर्चा है कि क्या वे जल्द ही इस पद से इस्तीफा देकर अपने विभाग लौटेंगे। हालांकि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक नियमों के अनुसार, शिक्षण कार्य 65 वर्ष की आयु तक किया जा सकता है, लेकिन प्रशासनिक पदों के लिए अधिकतम उम्र साठ वर्ष निर्धारित है। इस संदर्भ में यह भी सवाल उठता है कि क्या विश्वविद्यालय के कुलपति ने सरकार को डॉ. साहू का नाम भेजते समय इस बात का ध्यान रखा था। डॉ. साहू ने स्वयं कहा है कि उनका यह पद जेपीएससी के माध्यम से नियुक्त नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें चार्ज दिया गया है, इसलिए वे इस पद पर बने रह सकते हैं।
झारखंड के राज्यपाल एवं कुलाधिपति संतोष गंगवार ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों में ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की नीति का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन रांची विश्वविद्यालय में यह नीति लागू होती नहीं दिख रही। यहां कुलपति का पद भी अन्य विश्वविद्यालयों के साथ साझा किया जा रहा है। वर्तमान में डॉ. डी.के. सिंह, जो झारखंड विश्वविद्यालय प्रौद्योगिकी के कुलपति हैं, रांची विश्वविद्यालय के भी कुलपति के रूप में कार्यभार संभाले हुए हैं। वे इसी के साथ डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के एक्टिंग कुलपति भी हैं। इस प्रकार वे एक साथ तीन विश्वविद्यालयों के प्रबंधन का कार्य कर रहे हैं।
रांची विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति अजीत कुमार सिन्हा 20 जून 2025 को सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद 21 जून को नीलांबर पितांबर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.के. सिंह को रांची विश्वविद्यालय का चार्ज दिया गया। हालांकि उनके खिलाफ कई आरोप लगे और 30 जुलाई को राज्यपाल ने उन्हें इस पद से हटा दिया। इसके बाद डॉ. सिंह को झारखंड विश्वविद्यालय प्रौद्योगिकी के कुलपति के रूप में रहते हुए रांची विश्वविद्यालय का भी प्रभार दिया गया। हाल ही में डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के एक्टिंग कुलपति के सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें उस विश्वविद्यालय का भी चार्ज मिला। इस तरह वर्तमान में वे तीन विश्वविद्यालयों के कुलपति के रूप में कार्यभार निभा रहे हैं, जो प्रशासनिक तौर पर चुनौतीपूर्ण स्थिति उत्पन्न कर रहा है।

