झारखंड के शिक्षा क्षेत्र में बड़ी चुनौती सामने आ गई है। राज्य के 515 स्कूल और कॉलेजों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान के ऑनलाइन फॉर्म भरने से इनकार कर दिया है। इसकी वजह 75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि के प्रस्ताव पर कैबिनेट की सहमति नहीं मिलना बताया जा रहा है। इस कारण इन संस्थानों को मिलने वाली सरकारी सहायता पर संकट मंडरा रहा है।
राज्य सरकार ने इस वित्तीय वर्ष के लिए शिक्षा संस्थानों को अनुदान देने के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट रखा है। हर साल करीब 620 से 625 संस्थान अनुदान के लिए आवेदन करते हैं, जिनमें इंटर कालेज, उच्च विद्यालय, मदरसा और संस्कृत विद्यालय शामिल हैं। इस बार 10 से 15 नए संस्थानों ने आवेदन किया, लेकिन अधिकांश संस्थानों ने फॉर्म भरने से मना कर दिया। खास बात यह है कि इस बार कोई भी मदरसा या संस्कृत विद्यालय अनुदान फॉर्म नहीं भर सका।
वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने इस अनुदान प्रपत्र न भरने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि महंगाई बढ़ने के कारण उन्हें 75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि की तत्काल मंजूरी मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि संबद्ध डिग्री कॉलेजों को पहले ही यह लाभ मिल चुका है, लेकिन इंटर कालेज और अन्य संस्थानों को अभी तक इंतजार करना पड़ रहा है।
झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में भी इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है। प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार ने गुणवत्ता के आधार पर अनुदान देने और समय पर भुगतान का आश्वासन दिया था। अब सवाल यह है कि सरकार इस समस्या का समाधान कब करेगी और क्या इन 515 संस्थानों की इस आवाज को सुना जाएगा या शिक्षा क्षेत्र में गहरा संकट खड़ा हो जाएगा।

