Jharkhand News: बीसीसीएल के कतरास क्षेत्र की मां अंबे आउटसोर्सिंग पैच में सितंबर 2025 की शुरुआत में हुए भीषण भू-धंसान में सात लोगों की मौत हो गई थी। हादसा ओवरबर्डन स्लाइड के कारण हुआ, जिसमें एक सर्विस वैन 400 फीट गहरी खाई में गिर गई। इसमें मजदूर और आउटसोर्सिंग कर्मचारी शामिल थे। घटना के तुरंत बाद 26 घंटे तक चले बचाव अभियान में एनडीआरएफ और बीसीसीएल टीम ने सभी शव बरामद किए। इस दुर्घटना ने खनन सुरक्षा और माइनिंग मानकों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
DGMS की जांच और कानूनी कार्रवाई
लंबी जांच और वैज्ञानिक अध्ययन के बाद खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) ने सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी पाई। इसके बाद धनबाद जिला न्यायालय में तत्कालीन समेत चार वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। डीजीएमएस की तीन सदस्यीय टीम ने घटना स्थल का विस्तृत अध्ययन किया। जांच में स्पष्ट हुआ कि माइनिंग सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था। अधिकारी और प्रबंधन की लापरवाही इस जानलेवा हादसे की मुख्य वजह थी। अब न्यायालय द्वारा संबंधित अधिकारियों को समन जारी किया जाएगा।
BIT सिंदरी के वैज्ञानिकों का अध्ययन
इस घटना का वैज्ञानिक अध्ययन बीआईटी सिंदरी के विशेषज्ञों ने किया। उनका निष्कर्ष है कि ओवरबर्डन डंप (कोयला खनन से निकले मलबे का पहाड़) तैयार करने में मानकों का उल्लंघन हुआ। मलबे की ढलान सही तरीके से नहीं बनाई गई थी, जिससे 25 मीटर बेंच खिसक गई और 10 मीटर रोड ढह गया। हाईवाल बेंच फेल्योर लगभग 20-25 मीटर के दायरे में हुआ। वैज्ञानिकों ने सस्टेनबिलिटी ऑफ द बेंचेस के लिए कई सुझाव दिए हैं। बीसीसीएल प्रबंधन इन सुझावों पर काम कर डीजीएमएस को विवरण भेजेगा, तब ही खदान में फिर से खनन की अनुमति दी जाएगी।
घटना के निष्कर्ष और सुधार के उपाय
मां अंबे खदान हादसे ने माइनिंग सुरक्षा की अनदेखी और अवैध खनन के खतरों को उजागर कर दिया। डीजीएमएस ने अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की शुरूआत की है। वर्तमान में खदान से केवल पानी निकासी का काम हो रहा है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार, मलबे की ढलान तैयार करते समय सही कोण और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ। बीसीसीएल प्रबंधन ने सुधारात्मक उपाय शुरू कर दिए हैं। यह हादसा खनन सुरक्षा और मानकों की अनदेखी के गंभीर परिणामों का उदाहरण बन गया है।
