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Jharkhand News: गरीब मरीजों की जेब पर ब्रांडेड दवाओं का बोझ, SNMMCH के डॉक्टर कर रहे जेनरिक दवा की अनदेखी

Jharkhand News: धनबाद के एसएनएमएमसीएच में कई चिकित्सक राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के निर्देशों की परवाह किए बिना मरीजों को ब्रांडेड दवाएं लिख रहे हैं। जबकि अस्पताल में जेनरिक दवाओं की सुविधाएं उपलब्ध हैं, फिर भी ओपीडी में डॉक्टर जेनरिक दवा की जगह महंगी ब्रांडेड दवाएं ही लिखते हैं। इससे खासकर गरीब मरीजों को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है क्योंकि उन्हें दवा खरीदने के लिए बाहर की दुकान पर जाना पड़ता है।

जेनरिक दवा और ब्रांडेड दवा में भारी अंतर

ब्रांडेड दवाओं की तुलना में जेनरिक दवाएं लगभग चार से छह गुना सस्ती होती हैं। उदाहरण के लिए, ब्रांडेड दवा की कीमत यदि 100 रुपये हो तो जेनरिक दवा 20 रुपये से भी कम में मिल जाती है। मेटफार्मिन जैसे मधुमेह की दवा ब्रांडेड में 200 रुपये तक होती है, जबकि जेनरिक में यह केवल 6 रुपये में उपलब्ध है। इसी प्रकार एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन ब्रांडेड में 150 रुपये का होता है, पर जेनरिक में 30-40 रुपये में मिल जाता है। गरीब मरीजों के लिए यह बचत बहुत महत्वपूर्ण होती है।

Jharkhand News: गरीब मरीजों की जेब पर ब्रांडेड दवाओं का बोझ, SNMMCH के डॉक्टर कर रहे जेनरिक दवा की अनदेखी

चिकित्सकों और दवा कंपनियों की सांठगांठ

अस्पताल में ब्रांडेड दवाएं लिखे जाने के पीछे चिकित्सकों और दवा कंपनियों के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया जा रहा है। बताया जाता है कि दवा लिखने पर चिकित्सकों को 30 से 40 प्रतिशत तक का कमीशन मिलता है। साथ ही कई बार अस्पताल के बाहर के दवा दुकानदारों से भी चिकित्सकों का संबंध होता है, जिससे मरीजों को मजबूरन महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। इससे मरीजों का आर्थिक संकट और बढ़ जाता है।

मरीजों के अनुभव: दर्द भरी सच्चाई

निरसा के विकास महतो को जब बुखार व खांसी की शिकायत थी तो उन्हें अस्पताल में केवल एक एंटीबायोटिक दवा ही मुफ्त मिली। बाकी दवाएं महंगी ब्रांडेड होने के कारण बाहर से खरीदनी पड़ीं। इसी तरह गिरिडीह के दशरथ महतो ने बताया कि चिकित्सक ने विशेष दवा दुकान भेजी जहां से उन्होंने महंगी दवाएं खरीदनी पड़ीं और बिल भी नहीं मिला। ये दोनों मामले दिखाते हैं कि गरीब मरीजों को किस तरह आर्थिक तंगहाली का सामना करना पड़ता है।

एनएमसी के निर्देश और अस्पताल की जिम्मेदारी

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सरकारी चिकित्सकों को पर्ची में किसी ब्रांड का नाम लिखने से बचना चाहिए और जेनरिक दवा का नाम बड़े अक्षरों में लिखना चाहिए ताकि मरीज जन औषधि केंद्र से सस्ती दवा खरीद सकें। एसएनएमएमसीएच के वरिष्ठ अस्पताल प्रबंधक डॉ. सीएस सुमन ने कहा है कि जेनरिक दवाओं का उपयोग अनिवार्य है और अस्पताल में नियमित निरीक्षण के माध्यम से इसका पालन करवाया जा रहा है। चिकित्सकों से अपील की गई है कि वे इस नियम का सख्ती से पालन करें ताकि गरीब मरीजों को आर्थिक राहत मिल सके।

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