Jharkhand News: वर्षों की उपेक्षा के बाद अब झारखंड के Pakur Railway Station के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे इंतजार और स्थानीय मांगों के बाद गुरुवार से शताब्दी एक्सप्रेस और सरायघाट एक्सप्रेस का ठहराव यहां शुरू होने जा रहा है। इस पहल का ऑनलाइन उद्घाटन केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी द्वारा किया जाएगा। अब तक ये प्रमुख ट्रेनें बिना रुके स्टेशन से गुजर जाती थीं, लेकिन इस निर्णय से यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
आंदोलन और व्यापारियों के विरोध से बदला रेलवे का रुख
स्थानीय जनप्रतिनिधि लंबे समय से दिल्ली, पटना सहित प्रमुख रूटों की ट्रेनों के ठहराव की मांग कर रहे थे, लेकिन रेलवे की ओर से इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा था। इसके बाद पाकुड़ और साहिबगंज के पत्थर कारोबारियों ने विरोध स्वरूप रेलवे को पत्थर की ढुलाई बंद कर दी, जिससे रेलवे की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई। इस आंदोलन को झामुमो ने भी समर्थन दिया, जिसके कारण मामले ने और तूल पकड़ लिया और रेलवे पर दबाव बढ़ता गया।
वार्ता के बाद बनी सहमति, राजस्व पर पड़ा असर
स्थिति गंभीर होने पर हावड़ा में जीएम की अध्यक्षता में रेलवे अधिकारियों, पत्थर कारोबारियों और झामुमो प्रतिनिधियों के बीच वार्ता आयोजित की गई। इस बैठक में कई मांगों पर चर्चा हुई और अंततः दो प्रमुख ट्रेनों के ठहराव पर सहमति बनी। आंदोलन के चलते पत्थर और कोयला ढुलाई प्रभावित होने से रेलवे को प्रतिदिन करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ, जिसने भी निर्णय को प्रभावित किया। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह केवल शुरुआत है और आगे अन्य ट्रेनों के ठहराव की उम्मीद भी बढ़ी है।
उपेक्षा के बावजूद राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान, आगे विकास की उम्मीद
हावड़ा डिवीजन में 3000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व देने वाला यह स्टेशन अब तक अपेक्षित सुविधाओं से वंचित रहा है। राजस्व के मामले में दूसरे स्थान पर होने के बावजूद इसे ए श्रेणी का दर्जा नहीं मिल सका है। वर्तमान में एक दर्जन से अधिक एक्सप्रेस ट्रेनें यहां बिना रुके गुजरती हैं, और कोरोना काल में बंद हुई कई सेवाएं अभी तक बहाल नहीं हुई हैं। हालांकि, गोड्डा तक नई रेल लाइन और पाकुड़-सैंथिया फोर लाइन परियोजना जैसी योजनाओं से भविष्य में कनेक्टिविटी और यात्री सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है, जिससे क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।
