Jharkhand News: असम विधानसभा चुनावों की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने साफ कर दिया है कि इस बार वह अकेले चुनाव लड़ेगी। हालांकि कांग्रेस के साथ गठबंधन बनाने की कोशिशें हुईं, लेकिन किसी समझौते पर पहुंचा नहीं जा सका। JMM की शीर्ष नेतृत्व ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं के साथ कई दौर की बातचीत की, जिसमें सीटों के बंटवारे और चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई। किन्तु दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके चलते JMM ने यह निर्णय लिया कि वह अकेले चुनाव लड़ेगी।
19 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा और चुनाव चिन्ह
JMM ने घोषणा की है कि वह असम की 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। पार्टी ने अपना चुनाव चिन्ह ‘धनुष और तीर’ सुरक्षित कर लिया है और उम्मीदवारों को चिन्ह आवंटित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडे ने उम्मीदवारों को उनके चुनाव चिन्ह सौंप दिए हैं। इसके साथ ही पार्टी ने कई प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों के नामों की भी घोषणा की है। माजबाट विधानसभा सीट के लिए प्रीति रेखा बारला को टिकट दिया गया है जबकि सोनारी सीट के लिए बालदेव टेली को उम्मीदवार घोषित किया गया है। इसके अलावा, JMM ने एक सीट को CPIML के लिए छोड़ने का निर्णय लिया है, जो पार्टी का सहयोगी है।
चाय बागानों और आदिवासी वोटों पर रणनीति
JMM की रणनीति असम के चाय बागानों और वहां रहने वाले ‘टी ट्राइब्स’ तथा अन्य आदिवासी समुदायों पर विशेष फोकस करने की है। इन इलाकों में बड़ी संख्या में मतदाता हैं और पार्टी को उम्मीद है कि इन क्षेत्रों में उसका प्रभाव चुनाव परिणाम में लाभकारी साबित होगा। दिलचस्प बात यह है कि झारखंड में JMM और कांग्रेस वर्तमान में गठबंधन सरकार चला रहे हैं, लेकिन असम में दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं। यह साफ दर्शाता है कि राजनीतिक समीकरण राज्य-विशेष होते हैं और राष्ट्रीय स्तर की नीतियों को हर राज्य में समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता।
नामांकन की अंतिम तिथि और मतदान की तैयारी
असम विधानसभा चुनाव में मतदान 9 अप्रैल को निर्धारित है। वहीं आज नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है। सभी राजनीतिक दल तेजी से अपने उम्मीदवारों को अंतिम रूप दे रहे हैं। चुनावी मैदान में JMM के इस अकेले दांव और चाय बागानों तथा आदिवासी क्षेत्रों पर केंद्रित रणनीति के चलते परिणामों पर नजर रखी जा रही है। असम की राजनीतिक हलचल इस बार भी सभी दलों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
