Jharkhand News: झारखंड में RTE अधिनियम 2009 से पहले नियुक्त प्राथमिक शिक्षक अब आगामी झारखंड टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (JTET) में शामिल हो सकेंगे। हालांकि, उनके लिए परीक्षा देना अनिवार्य नहीं होगा। यह पूरी तरह से वैकल्पिक है। चाहे कोई शिक्षक RTE लागू होने से पहले नियुक्त हुआ हो या अन्य शिक्षक हो, जो इस पात्रता परीक्षा में शामिल होना चाहता है, वह आवेदन कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद JTET नियमों में संशोधन
शिक्षा विभाग ने JTET नियमों में यह प्रावधान शामिल किया है ताकि RTE लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षक इस परीक्षा में शामिल हो सकें और अपनी पात्रता प्राप्त कर सकें। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल एक आदेश में कहा था कि TET पास करना इन शिक्षकों के लिए भी अनिवार्य है। शिक्षकों को इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए दो साल की छूट दी गई है। यदि वे इस अवधि में परीक्षा पास नहीं करते हैं, तो सेवा से हटाया जा सकता है।
सेवा अवधि और विरोध प्रदर्शन
RTE से पहले नियुक्त ऐसे प्राथमिक शिक्षक जिनकी सेवा अवधि पाँच साल या उससे कम बची है, उन्हें हटाया नहीं जाएगा। हालांकि, उनकी पदोन्नति रोकी जा सकती है। इस आदेश के विरोध में पूरे देश में शिक्षक प्रदर्शन कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ कुल 40 समीक्षा याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इसमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, मेघालय और ओडिशा जैसी राज्य सरकारों की याचिकाएं शामिल हैं। झारखंड में केवल अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने याचिका दाखिल की है और राज्य सरकार से अपने पक्ष में भी समीक्षा याचिका दायर करने का आग्रह किया है।
शिक्षा विभाग का “वेट एंड वॉच” रुख
झारखंड शिक्षा विभाग ने RTE लागू होने से पहले नियुक्त प्राथमिक शिक्षकों के लिए TET अनिवार्यता पर “वेट एंड वॉच” रणनीति अपनाई है। विभाग सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहा है और उसके बाद ही कोई ठोस निर्णय लेगा। फिलहाल, विभाग ने ऐसे शिक्षकों को JTET में शामिल होने का विकल्प प्रदान किया है, ताकि यदि सुप्रीम कोर्ट TET को अनिवार्य ठहराता है, तो शिक्षकों को परीक्षा देने का अवसर मिल सके। लगभग 25,000 प्राथमिक शिक्षक अभी तक TET पास नहीं कर पाए हैं।
