Jharkhand News: झारखंड के झुमरी टांड़ में गुरुवार को पूर्व मंत्री योगेंद्र साव का घर और जमीन बड़ी-बड़ी जेसीबी मशीनों से जमींदोज कर दिया गया। यह कार्रवाई NTPC Limited की सीबी कोल परियोजना विस्तार के तहत अधिग्रहित भूमि पर की गई। प्रशासन ने इस दौरान पूरे इलाके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। सूत्रों के अनुसार मुआवजे की राशि पहले ही ट्रिब्यूनल कोर्ट में जमा कर दी गई थी और उसी प्रक्रिया के तहत मकान खाली कराकर तोड़ा गया।
पूर्व विधायक परिवार का विरोध और नाराजगी
इस कार्रवाई को लेकर पूर्व विधायक योगेंद्र साव की पुत्री अंबा प्रसाद ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि मामला न्यायालय में लंबित था और कंपनी की ओर से ही कोर्ट में ले जाया गया था। इसके बावजूद बिना कोर्ट की मंजूरी के इस तरह की कार्रवाई की गई। अंबा प्रसाद ने आरोप लगाया कि प्रशासन और कंपनी ने नियमों के विपरीत और जल्दबाजी में यह कार्रवाई की। उनके अनुसार यह कदम योगेंद्र साव और उनके परिवार के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार का हिस्सा है।
योगेंद्र साव का आरोप: अबुआ सरकार की मनमानी
पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने भी वीडियो संदेश जारी कर प्रशासन और सरकार पर कड़ा आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि उनकी अनुपस्थिति में पहले 1 अगस्त 2025 को उनकी फैक्ट्री को ध्वस्त किया गया था और अब 19 मार्च 2026 को उनके झुमरी टांड़ स्थित मकान को जमींदोज कर दिया गया। योगेंद्र साव ने इसे अबुआ सरकार की मनमानी बताते हुए कहा कि लगातार उनके परिवार की संपत्तियों पर कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने से पहले की गई, जो नियमों के खिलाफ है।
समर्थकों में नाराजगी, प्रशासनिक दबाव
इस घटना के बाद इलाके में समर्थकों में भारी नाराजगी देखी गई। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल, प्रशासनिक अधिकारी और परियोजना से जुड़े कर्मी मौजूद थे। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो। योगेंद्र साव और उनके परिवार के समर्थक इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण मानते हुए सरकार और NTPC Limited पर सवाल उठा रहे हैं। इस घटना ने क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक हलचल भी पैदा कर दी है।
