Jharkhand Weather: झारखंड के विभिन्न जिलों में ठंड ने अपना असर बढ़ा दिया है। राजधानी रांची सहित कई इलाकों में पिछले दिनों से न्यूनतम तापमान में गिरावट आई है। मौसम विभाग, रांची के अनुसार उत्तर से उत्तर-पश्चिम की ओर से चल रही पश्चिमी हवाओं के कारण तापमान में लगभग चार डिग्री की कमी आई है। मंगलवार को मौसम साफ़ रहा और राज्य के अधिकांश हिस्सों में मध्यम गति से हवाएं चलीं। राजधानी में सुबह का तापमान करीब 10 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है, जिससे सूर्य उगने से पहले काफी ठंड महसूस हो रही है। इस बार सर्दी समय से पहले ही दस्तक दे गई है।
किसानों के लिए बढ़ा खतरा, कृषि विशेषज्ञों ने दिए सुझाव
लगातार गिरते तापमान से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। खेतों में नमी और बढ़ती ठंड का सीधा असर फसलों पर पड़ सकता है। कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे सुबह और शाम हल्की सिंचाई करें ताकि फसलों को ठंड से बचाया जा सके। इसके अलावा, मटर की 25 से 30 दिन पुरानी फसल में समय-समय पर निराई-गुड़ाई करना आवश्यक है जिससे पौधे मजबूत हों। जो किसान खरीफ की कटाई कर चुके हैं, उन्हें गेहूं की बुवाई पर तत्काल ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है।

गेहूं और चना की बेहतर किस्में, बीजों का रोगमुक्त उपचार जरूरी
सिंचित क्षेत्रों के लिए विशेषज्ञों ने गेहूं की कई उन्नत किस्मों जैसे K-1006, HD 2967, DBW 39 और बिरसा गेहूं 3 की सिफारिश की है। वहीं, अनसिंचित भूमि के लिए K-1317 और HI 1612 बेहतर मानी जा रही हैं। बुवाई से पहले बीजों का कार्बेन्डाजिम या बेटावैक्स से उपचार करना जरूरी बताया गया है ताकि बीज रोगमुक्त रहें। चना की खेती करने वाले किसानों को भी फील्ड को अच्छी तरह से तैयार करने और ऐसी जगहों पर खास ध्यान देने को कहा गया है जहां पानी जमा न हो। बेहतर किस्मों में BG 3043 और बिरसा चना 3 को चुना जा रहा है।
सब्जियों में बीमारियों का खतरा, विशेष सावधानी जरूरी
सब्जियों में भी रोगों का खतरा बढ़ गया है। खासकर पत्तागोभी में डायमंड बैक मोंथ की समस्या सामने आई है, जिसके लिए स्पिनोसैड का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। टमाटर में लेट ब्लाइट की संभावना अधिक होने के कारण विशेष कीटनाशकों का प्रयोग जरूरी बताया गया है। कृषि वैज्ञानिक मौसम के बदलते पैटर्न को हल्के में न लेने और समय पर उचित बचाव के उपाय करने पर जोर दे रहे हैं।
शीतकालीन चक्रवात का खतरा, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट
एक तरफ झारखंड में ठंड बढ़ रही है, वहीं बंगाल की खाड़ी में दो दबाव क्षेत्र बनने से शीतकालीन चक्रवात के खतरे ने भी लोगों को चिंतित कर दिया है। विशेषज्ञ इन दबाव क्षेत्रों की निगरानी कर रहे हैं, जिनमें से एक तेज़ी से विकसित होकर अगले 72 घंटों में चक्रवात बन सकता है। दक्षिण ओडिशा में इसके हल्के वर्षा होने की संभावना है। इसके अलावा, ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में 27 नवंबर तक 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज़ हवाएं चल सकती हैं। इस तेज़ हवाओं का प्रभाव राजधानी रांची सहित आसपास के इलाकों में भी महसूस किया जा सकता है। अगले दो-तीन दिनों में राज्य में तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है।

