Jharkhand News: झारखंड के जमशेदपुर में टाटा स्टील के लिए एक बड़ी और उत्साहवर्धक खबर आई है। केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर कंपनी के नेचुरल रिसोर्सेज डिवीजन को कोयला और लिग्नाइट की खोज (सर्वे) करने की अनुमति दे दी है। अब टाटा स्टील को बार-बार सरकारी खनन लाइसेंस के इंतजार में समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा। इस फैसले से खनन की प्रक्रिया लगभग छह महीने तेजी से शुरू हो सकेगी, जिससे न केवल टाटा स्टील बल्कि देश की ऊर्जा जरूरतों को भी जल्दी पूरा करने में मदद मिलेगी।
2030 के लक्ष्य और कच्चे माल की सुरक्षा
टाटा स्टील अपनी उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है और कंपनी का लक्ष्य 2030 तक 40 मिलियन टन प्रति वर्ष उत्पादन हासिल करना है। इतने बड़े स्तर पर उत्पादन के लिए कोयला और लोहे के अयस्क की निरंतर आपूर्ति सबसे बड़ी चुनौती है। टाटा स्टील के पास नोमंडी, झारिया और वेस्ट बोकाड़ो में प्रमुख कोयला खदानें हैं, जो कंपनी की रीढ़ की हड्डी हैं। MMDR एक्ट में हुए संशोधनों के बाद देश के कई कैप्टिव खदानों का पट्टा 2030 तक बढ़ा दिया गया है। ऐसे में नए कोयला भंडार खोजने की जरूरत और भी बढ़ गई है।

नियमों में हुआ बड़ा बदलाव
पहले निजी कंपनियों को हर बार खनिज खोजने के लिए सरकार से अलग-अलग परमिशन और लाइसेंस लेना पड़ता था, जो बहुत जटिल और लंबी प्रक्रिया होती थी। अब MMDR एक्ट की धारा 4 के तहत 18 निजी एजेंसियों को खुदाई की मंजूरी दी गई है, जिसमें टाटा स्टील (ईस्ट सिंहभूम) भी शामिल है। इसका मतलब यह हुआ कि कंपनियां सीधे अपने कॉम्पिटेंट प्राइवेट एजेंसियों के माध्यम से कोयला ब्लॉकों की खुदाई कर सकेंगी, जिन्हें सरकार की अनुमति पहले नहीं देती थी। इससे खनन कार्य में तेजी आएगी और देश आत्मनिर्भर भारत के ऊर्जा क्षेत्र के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ेगा।
अन्य बड़ी कंपनियों को भी मिली जिम्मेदारी
टाटा स्टील के नेचुरल रिसोर्सेज डिवीजन के अलावा सरकार ने देशभर की 17 अन्य कंपनियों को भी इस कार्य के लिए चुना है। इनमें कोलकाता की इंडियन माइन प्लानिंग एंड कंसल्टेंट्स, यूनाइटेड एक्सप्लोरेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, महेश्वरी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम की साउथवेस्ट जियोलॉजिकल एक्सप्लोरेशन लिमिटेड और कई अन्य प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। ये कंपनियां विभिन्न क्षेत्रों में कोयला और लिग्नाइट की खोज में अपना योगदान देंगी और खनन कार्य को गति प्रदान करेंगी।
आत्मनिर्भर भारत के ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम
कोयला मंत्रालय ने इस निर्णय को आत्मनिर्भर भारत अभियान का एक अहम हिस्सा बताया है। निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और आधुनिक तकनीक का उपयोग करके खनिज खोज के काम को तेज किया जाएगा। इससे न केवल कोयला और लिग्नाइट के उत्पादन में तेजी आएगी, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी। यह पहल देश के ऊर्जा क्षेत्र को स्वावलंबी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

