Jharkhand News: झारखंड में प्रतिबंधित वस्तुओं की कालाबाजारी लगातार बढ़ती जा रही है। इसी कड़ी में जमशेदपुर से एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां वन विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर चार तस्करों को सफेद समुद्री कोरल (मूंगा) के साथ गिरफ्तार किया है। इस मूंगा की कीमत लगभग 10 से 15 लाख रुपए आंकी गई है और इसका वजन करीब 3 किलो है। इस तस्करी का पर्दाफाश वन विभाग और वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के संयुक्त प्रयासों से संभव हुआ।
गुप्त सूचना पर हुई होटल में दबिश, तस्कर धराए गए
जानकारी के अनुसार, जमशेदपुर के एक होटल में सफेद समुद्री कोरल की खरीद-फरोख्त होने वाली थी। इस खबर के आधार पर वन विभाग की टीम और वन्य जीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की एक टीम ने होटल में जाकर खरीददार बनकर छापा मारा। जैसे ही तस्करों ने मूंगा का बैग खोला, उन्हें मौके पर ही धर दबोचा गया। गिरफ्तार तस्करों में रांची के तीन और पश्चिम सिंहभूम का एक व्यक्ति शामिल है। ये सभी मूंगा की अवैध तस्करी में लिप्त थे और उनके खिलाफ अब कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

समुद्री कोरल की बढ़ती मांग और प्रतिबंधित व्यापार
समुद्री कोरल का व्यापार लंबे समय से चल रहा है। लोगों की मान्यता है कि सफेद समुद्री कोरल घर में सुख-समृद्धि और शुभता लाता है, इसलिए इसे घरों में सजावट के तौर पर भी रखा जाता है। इसके अलावा, मूंगा से महंगे आभूषण जैसे हार, अंगूठी, कंगन आदि बनाए जाते हैं, जिसकी वजह से इसकी मांग बाजार में बहुत अधिक रहती है। हालांकि, सरकार ने इस कोरल की खरीद-बिक्री पर सख्त पाबंदी लगा रखी है, लेकिन फिर भी तस्कर मोटा मुनाफा कमाने के लिए इसका अवैध व्यापार कर रहे हैं।
तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की शुरुआत
वन विभाग ने जमशेदपुर से पकड़े गए तस्करों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है। उनके कब्जे से जब्त की गई समुद्री कोरल को प्रमाण के तौर पर रखा गया है और आगे की जांच जारी है। अधिकारियों ने बताया कि तस्करों का नेटवर्क बड़ा और संगठित है, जिसे तोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही जनता से भी अपील की गई है कि वे इस तरह की अवैध गतिविधियों की सूचना दें ताकि समय रहते इन्हें रोका जा सके।
समुद्री कोरल की तस्करी रोकना आवश्यक
सफेद समुद्री कोरल की तस्करी केवल अवैध ही नहीं बल्कि प्रकृति के लिए भी खतरनाक है। मूंगा समुद्र के जीव-जंतु होते हैं जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी तस्करी से समुद्री जीवन प्रभावित होता है और पारिस्थितिक असंतुलन पैदा होता है। इसलिए सरकार और वन विभाग दोनों मिलकर इस व्यापार को रोकने में लगे हैं। आम जनता को भी जागरूक होकर इस अवैध कारोबार से दूर रहना चाहिए और वन विभाग को सहयोग देना चाहिए।

