Jharkhand News: रांची के डंडा थाना क्षेत्र से एक गंभीर और संवेदनशील मामला प्रकाश में आया है, जहां एक सात दिन के नवजात शिशु को 5 लाख रुपये में बेचा गया। यह मामला तब उजागर हुआ जब पुलिस को ग्रामीणों से सूचना मिली कि डंडा थाना क्षेत्र के छपरदगा गांव के एक परिवार ने नवजात शिशु को जन्म के दूसरे दिन ही उसकी मां से जबरन छीनकर किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया है। इस सूचना के बाद डंडा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पलामू जिले के मेदिनीनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत रेड़मा से उस नवजात शिशु को बचा लिया है।
पुलिस की कार्रवाई और छापेमारी
डंडा थाना प्रभारी दिलीप कुमार ने इस मामले में विशेष छापेमारी कर नवजात शिशु को बरामद किया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने नवजात शिशु को खरीदने वाली एक महिला को भी हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, नवजात को खरीदने वाली महिला ने स्वीकार किया है कि उसने नवजात शिशु को 5 लाख रुपये में खरीदा है। पुलिस ने बताया कि नवजात की मां मानसिक रूप से कमजोर स्थिति में है, जबकि नवजात को खरीदने वाला परिवार संपन्न और सामाजिक रूप से प्रतिष्ठित है।

नवजात की मां और शिशु की स्वास्थ्य स्थिति
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नवजात की मां को भी गंभीर हालत में सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस और जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और शिशु की मां की उचित जांच और इलाज के लिए अस्पताल में दाखिला सुनिश्चित किया गया है। सीडब्ल्यूसी (चाइल्ड वेलफेयर कमिटी) गढ़वा ने भी इस मामले को अपनी संज्ञान में लिया है और नवजात शिशु एवं उसकी मां दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है ताकि उनकी देखभाल की जा सके और भविष्य में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो।
ग्रामीणों की भूमिका और पुलिस की तत्परता
यह घटना तब सामने आई जब ग्रामीणों ने डंडा थाना पुलिस को सूचना दी कि नवजात शिशु को उसके परिवार से छीनकर बेच दिया गया है। ग्रामीणों की सतर्कता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से यह संवेदनशील मामला उजागर हो सका। डंडा थाना पुलिस ने इसे एक आपराधिक मामला मानते हुए सभी जिम्मेदारों की पहचान और पकड़ के लिए तेजी से जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए नवजात शिशु को सुरक्षित स्थान पर रखने की व्यवस्था की है।
आगे की जांच और प्रशासन की पहल
डंडा थाना पुलिस इस मामले की पूरी जांच कर रही है और सभी आरोपितों को कानूनी कार्रवाई के दायरे में लाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। इस मामले में बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को सर्वोपरि रखा जा रहा है। प्रशासन ने भी चेतावनी दी है कि इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और बच्चों के हित में सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही, ऐसे मामलों को रोकने के लिए जागरूकता अभियानों को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न हों। इस घटना ने सामाजिक संवेदनशीलता को भी जगाया है और लोगों में बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित किया है।

