Jharkhand Municipal Election: झारखंड में नगर निकाय चुनावों के लिए एक बड़ा बदलाव आने वाला है। राज्य निर्वाचन आयोग ने आगामी नगर चुनावों में पहली बार इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की जगह मतपत्रों (बैलट पेपर) के इस्तेमाल का फैसला लिया है। इससे पहले राज्य के सभी नगर निकाय चुनाव EVM के जरिए ही होते आए हैं। मतपत्रों के जरिए वोटिंग से चुनाव प्रक्रिया थोड़ी जटिल हो जाएगी और मतदान से लेकर मतगणना तक चुनाव अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता और मेहनत करनी पड़ेगी। चुनाव दिसंबर से जनवरी के बीच आयोजित करने की तैयारी चल रही है और जल्द ही तारीखों की घोषणा की जाएगी। राज्य में कुल 49 नगर निकायों में चुनाव होंगे, जिनमें 9 नगर निगम, 18 नगर परिषद और 22 नगर पंचायत शामिल हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग ने यह निर्णय इसलिए लिया है क्योंकि EVM की उपलब्धता नहीं है। आयोग के पास मौजूद मशीनें अपनी आयु पूरी कर चुकी हैं और नई मशीनों की संख्या भी पर्याप्त नहीं है। अन्य राज्यों से EVM मंगाने के प्रयास भी असफल रहे हैं। पड़ोसी राज्यों में बिहार ने भी मशीन उपलब्ध कराने से मना कर दिया है। वहीं, मशीन बनाने वाली कंपनी को नए EVM सप्लाई करने में लगभग एक साल का समय लगेगा। इन परिस्थितियों को देखते हुए आयोग ने चुनाव मतपत्रों से कराने का फैसला किया है। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राधेश्याम प्रसाद ने बताया, “मेरे पास जो EVM हैं वे पुराने हो चुके हैं। दूसरे राज्य भी मशीन देने से मना कर रहे हैं। निर्माता कंपनी ने नए EVM सप्लाई करने में एक साल का वक्त मांगा है। इन सब कारणों से चुनाव मतपत्रों से कराने का निर्णय लिया गया है।”

राधेश्याम प्रसाद ने यह भी बताया कि नगर निकाय चुनावों में मतदाताओं को दो अलग-अलग रंग के मतपत्र दिए जाएंगे। एक रंग का मतपत्र चेयरमैन पद के लिए होगा जबकि दूसरा रंग वार्ड सदस्य पद के लिए। मतदान के समय मतदाता दोनों मतपत्रों पर अपने मत देंगे और उन्हें अलग-अलग बैलट बॉक्स में डालना होगा। इससे मतगणना के समय वोटों की सही पहचान और गिनती में आसानी होगी। आयोग ने बताया कि बैलट बॉक्स की संख्या भी मतदान केंद्रों के आधार पर निर्धारित कर ली गई है। पुराने बैलट बॉक्सों को फिर से पेंट कर तैयार किया जा रहा है ताकि चुनाव प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके।
परंपरागत तौर पर मतपत्र कोलकाता में छपते थे, लेकिन इस बार फैसला लिया गया है कि मतपत्रों की छपाई स्थानीय स्तर पर रांची में की जाएगी। इस काम के लिए एक प्रिंटिंग प्रेस को चयनित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आयोग का मानना है कि रांची में छपाई कराने से समय की बचत होगी और चुनाव की तैयारियां तेज होंगी। इससे मतपत्रों की गुणवत्ता और वितरण भी बेहतर होगा।
मतपत्रों से मतदान कराने का यह नया अनुभव चुनाव अधिकारियों के लिए चुनौतियों भरा होगा क्योंकि उन्हें मतपत्रों के वितरण, सुरक्षा और मतगणना की प्रक्रिया में अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। मतदाता भी इस नए तरीके को समझने और अपनाने में समय लगाएंगे। आयोग ने सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए हैं ताकि चुनाव निष्पक्ष, पारदर्शी और सुचारू रूप से सम्पन्न हो सकें। यह चुनाव झारखंड के लिए एक नया अध्याय साबित होगा, जहां तकनीक से हटकर पारंपरिक तरीके से लोकतंत्र की जड़ें मजबूत होंगी।

