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BCCL Amlabad Mine: स्टील इंडस्ट्री के लिए गेमचेंजर बनेगी धनबाद की अमलाबाद खदान, 25 साल तक उगलेगी ‘काला सोना’

BCCL Amlabad Mine : 62 लाख टन प्राइम कोकिंग कोयले के विशाल भंडार से लैस अमलाबाद भूमिगत खदान परियोजना को तेज़ी से शुरू करने की तैयारी, घरेलू स्टील उद्योग को मिलेगा बड़ा सहारा। 

BCCL Amlabad Mine : धनबाद जिले के पूर्वी झरिया क्षेत्र में स्थित अमलाबाद भूमिगत खदान परियोजना देश के इस्पात उद्योग के लिए एक बड़ी उम्मीद बनकर उभर रही है। भारत में उच्च गुणवत्ता वाले कोकिंग कोयले की बढ़ती मांग को देखते हुए भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्राथमिकता देते हुए इसकी तैयारियों में तेजी ला दी है। करीब 62 लाख टन प्राइम कोकिंग कोयले के विशाल भंडार वाली यह खदान अगले 25 वर्षों तक उत्पादन करने की क्षमता रखती है, जिससे देश के स्टील सेक्टर को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है।

अमलाबाद भूमिगत खदान से निकलने वाला वाशरी ग्रेड-1 और ग्रेड-2 कोकिंग कोयला घरेलू इस्पात उत्पादन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्तमान में भारत को अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कोकिंग कोयले से पूरा करना पड़ता है। ऐसे में यह परियोजना आयात पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

बुधवार को बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने पूर्वी झरिया क्षेत्र का दौरा कर अमलाबाद परियोजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना से संबंधित सभी प्रशासनिक, तकनीकी और पर्यावरणीय स्वीकृतियों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए ताकि निर्धारित अवधि में उत्पादन शुरू किया जा सके। सीएमडी ने स्पष्ट किया कि राजस्व साझेदारी मॉडल के तहत प्रस्तावित यह परियोजना कंपनी की प्राथमिकताओं में शामिल है और इसकी प्रगति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।

निरीक्षण के दौरान सीएमडी ने अमलगामेटेड भौरा नॉर्थ-साउथ के सी-2 हायर्ड पैच का भी जायजा लिया। उन्होंने उत्पादन क्षमता, जल निकासी व्यवस्था और कोयले की गुणवत्ता की समीक्षा करते हुए मानसून के मद्देनजर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में उत्पादन प्रभावित न हो, इसके लिए पंपिंग क्षमता बढ़ाई जाए, बिजली आपूर्ति निर्बाध रखी जाए और जल जमाव की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए।

मनोज कुमार अग्रवाल ने सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा और केवल गुणवत्तापूर्ण कोयले का ही डिस्पैच सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने एएसपी कोलियरी के ईस्टवर्ड एक्सटेंडेड फायर पैच का भी निरीक्षण किया और उत्पादन बढ़ाने, हॉल रोड को मानक अनुरूप बनाए रखने तथा पर्याप्त परिवहन संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बीसीसीएल प्रबंधन की नजर केवल उत्पादन पर ही नहीं बल्कि लॉजिस्टिक्स और डिस्पैच व्यवस्था को मजबूत करने पर भी है। इसी क्रम में सीएमडी ने सुदामडीह साइडिंग का निरीक्षण कर कोयला लोडिंग प्रणाली की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को प्रतिदिन 2.5 रेक कोयला लोडिंग क्षमता हासिल करने के लिए आवश्यक कदम उठाने तथा रेलवे की अतिरिक्त लाइन निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया। इससे कोयले की आपूर्ति प्रक्रिया अधिक तेज और प्रभावी हो सकेगी।

क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में सीएमडी ने कहा कि सुरक्षा, उत्पादन और गुणवत्ता के बीच संतुलन स्थापित करना ही वित्तीय वर्ष के लक्ष्यों को प्राप्त करने की कुंजी है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से टीम भावना के साथ काम करने का आह्वान करते हुए कहा कि बीसीसीएल के पास उत्पादन और डिस्पैच के नए रिकॉर्ड बनाने की पूरी क्षमता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमलाबाद भूमिगत खदान परियोजना झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है। स्टील उद्योग को गुणवत्तापूर्ण कोकिंग कोयले की निरंतर आपूर्ति मिलने से उत्पादन लागत में कमी आएगी और घरेलू उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी। साथ ही, परियोजना के शुरू होने से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

कुल मिलाकर, अमलाबाद खदान परियोजना बीसीसीएल के लिए एक रणनीतिक निवेश साबित हो सकती है। यदि परियोजना तय समय पर शुरू होती है तो यह आने वाले 25 वर्षों तक देश के स्टील उद्योग की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और भारत के औद्योगिक विकास को नई दिशा देगी।

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