Rajya Sabha Election 2026 : भाजपा के पास बहुमत नहीं फिर भी मैदान में उम्मीदवार उतारने की तैयारी, कांग्रेस और झामुमो में टिकट के लिए तेज हुई लॉबिंग
Rajya Sabha Election 2026 को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव से पहले भाजपा, कांग्रेस और झामुमो के बीच नंबर गेम और टिकट की राजनीति चरम पर पहुंच गई है। जानिए किसके पास कितनी ताकत और कौन हैं प्रमुख दावेदार।
झारखंड में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। राज्य की दो राज्यसभा सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। खास बात यह है कि बहुमत का आंकड़ा पूरा नहीं होने के बावजूद भाजपा ने चुनावी मैदान में उतरने का संकेत देकर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन के भीतर कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बीच सीटों और उम्मीदवारों को लेकर अंदरखाने चर्चाएं तेज हैं।
राज्यसभा चुनाव में कितना है जीत का गणित?
झारखंड विधानसभा के मौजूदा समीकरण के अनुसार राज्यसभा चुनाव में पहली वरीयता से जीत हासिल करने के लिए किसी उम्मीदवार को कम से कम 28 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। यही वजह है कि सभी दल अपने-अपने नंबर जोड़ने में लगे हुए हैं।
वर्तमान राजनीतिक आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा और उसके सहयोगियों यानी NDA के पास कुल 24 विधायक हैं। यानी जीत के लिए उसे कम से कम चार अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी। इसके बावजूद भाजपा ने पीछे हटने के बजाय रणनीतिक लड़ाई लड़ने का फैसला किया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा का यह कदम केवल चुनाव जीतने के लिए नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश देने और गठबंधन की एकजुटता को चुनौती देने की रणनीति भी हो सकती है।
भाजपा क्यों खेल रही है बड़ा दांव?
प्रदेश भाजपा ने संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा शुरू कर दी है। पार्टी की प्रदेश चुनाव समिति की बैठक में कई नामों पर विचार-विमर्श किया गया और अंतिम चयन के लिए तीन नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजे जाने की चर्चा है।
पिछले एक दशक का रिकॉर्ड देखें तो भाजपा ने झारखंड में संगठन से जुड़े नेताओं पर लगातार भरोसा जताया है। वर्ष 2016 में महेश पोद्दार को राज्यसभा भेजने के बाद पार्टी ने समीर उरांव, दीपक प्रकाश, आदित्य साहू और प्रदीप वर्मा जैसे संगठन से जुड़े नेताओं को मौका दिया।
यही कारण है कि इस बार भी संभावना जताई जा रही है कि भाजपा किसी संगठनात्मक पृष्ठभूमि वाले चेहरे पर दांव खेल सकती है।
कांग्रेस में टिकट के लिए तेज हुई दिल्ली दौड़
इधर सत्ताधारी गठबंधन के भीतर कांग्रेस ने भी अपनी दावेदारी मजबूत करनी शुरू कर दी है। कांग्रेस के कई बड़े नेता राज्यसभा टिकट के लिए सक्रिय हो गए हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय, पूर्व सांसद धीरज साहू और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर दिल्ली में लगातार शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर रहे हैं। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकातों का दौर जारी है।
सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व ने झारखंड प्रभारी के. राजू और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क को बातचीत आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी है। दोनों नेता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से चर्चा कर गठबंधन का अंतिम फार्मूला तय कर सकते हैं।
झामुमो सबसे मजबूत स्थिति में
झारखंड मुक्ति मोर्चा फिलहाल सबसे मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। पार्टी के पास वर्तमान में 34 विधायक हैं, जिससे उसकी एक सीट पर जीत लगभग तय मानी जा रही है।
झामुमो की ओर से कई नाम चर्चा में हैं। इनमें दिवंगत शिबू सोरेन की बेटी अंजलि सोरेन, पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर और कुणाल सारंगी के नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झामुमो इस चुनाव के जरिए राजनीतिक और सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश कर सकती है।
परिमल नथवानी की एंट्री ने बढ़ाई दिलचस्पी
राज्यसभा चुनाव के बीच दो बार झारखंड से सांसद रह चुके परिमल नथवानी का नाम भी चर्चाओं में है। वर्तमान में आंध्र प्रदेश से सांसद नथवानी ने झारखंड को अपनी प्राथमिकता बताते हुए इंडिया गठबंधन के जरिए राज्यसभा पहुंचने की इच्छा जताई है।
उनकी सक्रियता ने राजनीतिक समीकरणों को और रोचक बना दिया है। यदि गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे में बदलाव होता है तो नथवानी का नाम निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
क्या मुकाबला होगा त्रिकोणीय?
मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए राज्यसभा चुनाव में मुकाबला सीधा नहीं बल्कि त्रिकोणीय होने की संभावना बन रही है। भाजपा, कांग्रेस और झामुमो की रणनीतियां अलग-अलग दिशा में चल रही हैं।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कौन सा दल नंबर गेम में बाजी मारता है और किस नेता को दिल्ली से हरी झंडी मिलती है। आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति और अधिक गर्माने की संभावना है।
झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 सिर्फ दो सीटों का चुनाव नहीं बल्कि राजनीतिक ताकत, गठबंधन प्रबंधन और रणनीतिक गणित की परीक्षा बन चुका है। बहुमत से दूर भाजपा का दांव, कांग्रेस की लॉबिंग और झामुमो की मजबूत स्थिति इस चुनाव को बेहद दिलचस्प बना रही है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नाम सामने आते ही सियासी समीकरण और तेजी से बदल सकते हैं।
