Jharkhand CRPF : चाईबासा के कोल्हान जंगल में ऑपरेशन के दौरान लापता हुए CRPF जवान बादल मुर्मू का अब तक नहीं मिला कोई सुराग, पत्नी ने सरकार और एजेंसियों से लगाई न्याय की गुहार
Jharkhand CRPF : झारखंड के चाईबासा से CRPF की 197वीं बटालियन के जवान बादल मुर्मू पिछले तीन वर्षों से लापता हैं। परिवार का आरोप है कि नक्सल ऑपरेशन के दौरान उनका अपहरण कर लिया गया था। अब जवान की पत्नी झानो मुर्मू ने भावुक वीडियो जारी कर सरकार, पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों से पति की तलाश और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा से एक बार फिर CRPF जवान बादल मुर्मू के लापता होने का मामला सुर्खियों में आ गया है। CRPF की 197वीं बटालियन में तैनात जवान बादल मुर्मू 6 जनवरी 2023 से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हैं। बताया जाता है कि वे कोल्हान जंगल क्षेत्र के तुम्बाहाका इलाके में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान अचानक गायब हो गए थे। तीन साल बीत जाने के बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
अब जवान की पत्नी झानो मुर्मू ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो जारी कर झारखंड सरकार, पुलिस प्रशासन और केंद्रीय एजेंसियों से पति को खोजने की अपील की है। वीडियो में उन्होंने कहा कि परिवार पिछले तीन वर्षों से लगातार इंतजार कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है। उन्होंने कहा कि “मेरे पति देश की सेवा करते हुए लापता हुए हैं, कृपया उन्हें खोजिए।”
ऑपरेशन पर जाने से पहले किया था आखिरी फोन
परिवार के मुताबिक, 5 जनवरी 2023 को बादल मुर्मू ने घर पर आखिरी बार फोन किया था। उस दौरान उन्होंने बताया था कि वे ऑपरेशन पर जा रहे हैं और मकर संक्रांति तक घर लौट आएंगे। लेकिन इसके बाद उनका फोन बंद हो गया और फिर कभी संपर्क नहीं हो पाया।
परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी के दौरान नक्सलियों ने उनका अपहरण कर लिया। हालांकि अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। परिवार लगातार यह मांग कर रहा है कि सरेंडर कर रहे नक्सलियों से पूछताछ कर बादल मुर्मू के बारे में जानकारी जुटाई जाए।
पत्नी ने की CBI जांच की मांग
झानो मुर्मू ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि अगर उच्चस्तरीय जांच एजेंसी मामले को देखेगी तो सच्चाई सामने आ सकती है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक किसी जवान का गायब रहना गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य के DGP को कई बार पत्र लिखकर मदद की अपील की है। बावजूद इसके अब तक परिवार को कोई ठोस जवाब या कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।
आर्थिक संकट से जूझ रहा परिवार
बादल मुर्मू के लापता होने के बाद परिवार आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों से गुजर रहा है। परिवार को केवल करीब 13 हजार रुपये की पेंशन मिल रही है, जिससे घर चलाना मुश्किल हो गया है। झानो मुर्मू को अपने छह साल के बेटे की पढ़ाई और परिवार की जिम्मेदारियों का बोझ अकेले संभालना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि हर दिन उम्मीद के साथ गुजरता है कि शायद किसी दिन उनके पति वापस लौट आएंगे या फिर उनके बारे में कोई जानकारी मिलेगी। लेकिन लगातार बीतते समय ने परिवार की चिंता और दर्द को और बढ़ा दिया है।
फिर उठे सुरक्षा और जवाबदेही के सवाल
इस घटना ने एक बार फिर नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली और जवानों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर कोई जवान ऑपरेशन के दौरान लापता होता है तो उसकी तलाश और जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जाना चाहिए।
साथ ही यह भी मांग उठ रही है कि सरकार को ऐसे मामलों में परिवारों को बेहतर आर्थिक सहायता और मनोवैज्ञानिक सहयोग उपलब्ध कराना चाहिए। बादल मुर्मू का मामला अब केवल एक जवान के लापता होने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह उन परिवारों के संघर्ष की कहानी बन गया है जो देश सेवा में लगे अपने प्रियजनों के लौटने का इंतजार करते हैं।
परिवार को अब भी उम्मीद
तीन साल गुजरने के बावजूद झानो मुर्मू और उनका परिवार उम्मीद नहीं छोड़ पाया है। परिवार को भरोसा है कि अगर सरकार गंभीरता से प्रयास करे और जांच एजेंसियां सक्रिय हों तो बादल मुर्मू के बारे में कोई न कोई जानकारी जरूर सामने आ सकती है।
फिलहाल परिवार न्याय, जवाब और अपने बेटे के पिता की तलाश में सरकार से लगातार गुहार लगा रहा है।
