Jharkhand News : सुरक्षा बलों के दबाव से कमजोर पड़ रहे नक्सली संगठन, 16 हथियार और 2500 से अधिक कारतूस बरामद
Jharkhand News : झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य पुलिस और सीआरपीएफ की लगातार कार्रवाई के बीच 27 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। राजधानी रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान डीजीपी तादाशा मिश्रा और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इन नक्सलियों ने हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने की घोषणा की।
आत्मसमर्पण करने वालों में 25 सदस्य भाकपा माओवादी संगठन से जुड़े बताए जा रहे हैं, जबकि 2 नक्सली जेजेएमपी संगठन के सदस्य हैं। इन सभी ने सुरक्षा बलों के सामने 16 आधुनिक हथियार और 2500 से अधिक कारतूस भी जमा किए। बरामद हथियारों में कई अत्याधुनिक रायफलें और अन्य घातक हथियार शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल नक्सली वारदातों में किया जाता था।
झारखंड में पिछले कुछ वर्षों से नक्सल विरोधी अभियान लगातार तेज किया गया है। जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में चलाए जा रहे संयुक्त ऑपरेशन के कारण नक्सली संगठनों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। पुलिस और सीआरपीएफ की रणनीतिक कार्रवाई के चलते कई बड़े नक्सली कमांडर मारे गए हैं या गिरफ्तार किए गए हैं। इसका असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है, जहां बड़ी संख्या में नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर रहे हैं।
इस मौके पर सीआरपीएफ के आईजी ने कहा कि सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और सफल अभियानों ने नक्सली संगठनों की कमर तोड़ दी है। उन्होंने कहा कि जंगलों में छिपे नक्सलियों के पास अब सीमित संसाधन बच गए हैं और संगठन कमजोर हो चुके हैं। इसी कारण अब कई नक्सली आत्मसमर्पण कर सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं। उन्होंने इसे सुरक्षा बलों और राज्य सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।
डीजीपी तादाशा मिश्रा ने भी इस आत्मसमर्पण को झारखंड में शांति स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। उन्हें रोजगार, प्रशिक्षण और अन्य सुविधाएं देकर सामान्य जीवन जीने का अवसर दिया जाएगा।
उन्होंने जंगलों में सक्रिय अन्य नक्सलियों से भी अपील की कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें और समाज के विकास में भागीदार बनें। डीजीपी ने कहा कि बंदूक और हिंसा से किसी समस्या का समाधान संभव नहीं है। विकास, शिक्षा और रोजगार ही समाज को आगे बढ़ाने का रास्ता है।
झारखंड लंबे समय से नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहा है। कई जिलों में नक्सलियों ने हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया है, जिससे आम लोगों के साथ-साथ सुरक्षा बलों को भी नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार और केंद्रीय सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्रों में स्थिति काफी बदली है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े विकास कार्यों के कारण ग्रामीण इलाकों में भी बदलाव दिखाई देने लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रहे आत्मसमर्पण यह संकेत देते हैं कि नक्सली संगठन अब कमजोर पड़ रहे हैं। सुरक्षा बलों की सख्ती और सरकार की पुनर्वास नीति दोनों मिलकर इस अभियान को सफल बना रहे हैं। आने वाले समय में यदि इसी तरह अभियान जारी रहा तो झारखंड पूरी तरह नक्सल मुक्त राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है।
