Jharkhand High Court : JPSC और JSSC परीक्षाओं में नियमों की अनदेखी पर हाई कोर्ट सख्त, 22 अपील याचिकाएं खारिज
Jharkhand High Court ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ केवल उन्हीं उम्मीदवारों को मिलेगा जो निर्धारित प्रारूप और समय सीमा के भीतर सही जाति प्रमाण पत्र जमा करेंगे। अदालत ने JPSC और JSSC से जुड़े 22 मामलों में अपील खारिज करते हुए नियमों के कड़ाई से पालन पर जोर दिया।
झारखंड हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ लेने के लिए उम्मीदवारों को आवेदन के समय ही निर्धारित प्रारूप में जाति प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य है। यदि कोई उम्मीदवार ऐसा नहीं करता है, तो उसे आरक्षित वर्ग का लाभ नहीं दिया जाएगा।
अदालत ने यह फैसला JPSC और JSSC की विभिन्न भर्तियों से जुड़ी 22 अपील याचिकाओं को खारिज करते हुए सुनाया।
हाई कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें एमएस सोनक और राजेश शंकर शामिल थे, ने अपने फैसले में कहा कि भर्ती विज्ञापन में दी गई शर्तों का पालन अनिवार्य है।
अदालत ने कहा कि केवल यह दावा करना पर्याप्त नहीं है कि उम्मीदवार किसी आरक्षित वर्ग से आता है। आवेदन की अंतिम तिथि तक उम्मीदवार के पास निर्धारित प्रारूप का वैध जाति प्रमाण पत्र होना चाहिए और उसका विवरण ऑनलाइन फॉर्म में सही तरीके से दर्ज होना चाहिए।
JPSC और JSSC द्वारा जारी विज्ञापनों में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि SC, ST और OBC वर्ग के उम्मीदवारों को आवेदन के समय निर्धारित प्रारूप में जाति प्रमाण पत्र की संख्या और जारी तिथि भरनी होगी।
लेकिन कई उम्मीदवारों ने:
- गलत प्रारूप का प्रमाण पत्र अपलोड किया
- केंद्र सरकार के प्रारूप का इस्तेमाल किया
- या अधूरी जानकारी भरी
बाद में दस्तावेज सत्यापन के समय सही प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के बावजूद, उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। कोर्ट ने इस निर्णय को पूरी तरह सही ठहराया।
अदालत ने साफ कहा कि आवेदन प्रक्रिया के बाद किसी भी प्रकार का सुधार स्वीकार नहीं किया जाएगा। दस्तावेज सत्यापन के दौरान सही प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने से उम्मीदवार को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा, यदि उसने पहले गलत जानकारी दी है।
अपीलकर्ताओं ने राम कुमार गिजरोया मामला का हवाला दिया, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि उस मामले में अंतिम तिथि निर्धारित नहीं थी, जबकि यहां स्पष्ट समय सीमा और प्रारूप तय था।
कोर्ट ने कहा कि उम्मीदवारों का कर्तव्य है कि वे विज्ञापन को ध्यान से पढ़ें और सभी निर्देशों का पालन करें। यदि किसी को कोई संदेह हो तो पहले ही स्पष्टीकरण लेना चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि:
- परीक्षा में बैठने की अनुमति का मतलब अंतिम चयन नहीं होता
- गलत तरीके से किसी को लाभ मिला है तो वह उदाहरण नहीं बन सकता
- रिक्त पद होने के बावजूद नियमों में ढील नहीं दी जा सकती
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:
- आवेदन के समय सही प्रारूप में जाति प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है
- अंतिम तिथि के बाद कोई सुधार मान्य नहीं
- आयोग का निर्णय पूरी तरह सही है
इस फैसले के साथ ही सभी 22 अपील याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
यह निर्णय भविष्य की सभी सरकारी भर्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। अब उम्मीदवारों को आवेदन करते समय अधिक सतर्क रहना होगा, क्योंकि छोटी सी गलती भी उनके करियर पर भारी पड़ सकती है।
