Jharkhand News : महज 9 घंटे 50 मिनट में समुद्र पार करने वाले सबसे कम उम्र के तैराक बने इशांक, झारखंड चैंबर ने किया सम्मानित
Jharkhand News : रांची में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में युवा तैराक इशांक सिंह को उनके अद्वितीय कारनामे के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने श्रीलंका और भारत के बीच स्थित 29 किलोमीटर लंबे पाल्क स्ट्रेट को मात्र 9 घंटे 50 मिनट में पार कर नया इतिहास रच दिया है।
फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की कार्यकारिणी समिति द्वारा आज रांची स्थित चैंबर भवन में एक प्रेरणादायक समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में युवा तैराक इशांक सिंह को उनके ऐतिहासिक कारनामे के लिए सम्मानित किया गया।
इशांक सिंह ने महज 9 घंटे 50 मिनट में भारत और श्रीलंका के बीच स्थित 29 किलोमीटर लंबे पाल्क स्ट्रेट को पार कर एक नई मिसाल कायम की है। इस अद्वितीय उपलब्धि के साथ उन्होंने सबसे कम उम्र में इस चुनौती को पूरा करने वाले तैराक के रूप में विशेष पहचान हासिल की है।
कार्यक्रम के दौरान चैंबर के सदस्यों ने न सिर्फ इशांक सिंह बल्कि उनके माता-पिता को भी सम्मानित किया और इस सफलता के लिए बधाई दी। समारोह में इशांक से उनके अनुभव, तैयारी और भविष्य की योजनाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि इशांक सिंह का यह कारनामा पूरे झारखंड के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा, “इतनी कम उम्र में जिस साहस, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रदर्शन इशांक ने किया है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।”
महासचिव रोहित अग्रवाल ने भी इशांक की सफलता को उनके कठिन परिश्रम और अनुशासन का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे देश के लिए गौरव की बात है।
कार्यक्रम के दौरान चैंबर की ओर से इशांक सिंह को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया गया। साथ ही उन्हें प्रोत्साहन राशि का चेक भी प्रदान किया गया। उपस्थित अन्य सदस्यों ने भी उन्हें पुरस्कृत कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस अवसर पर उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया, सह सचिव नवजोत अलंग, सह सचिव रोहित पोद्दार, कार्यकारिणी सदस्य तुलसी पटेल, मुकेश अग्रवाल और सदस्य पूनम आनंद सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। इशांक के माता-पिता और नाना की उपस्थिति ने इस सम्मान समारोह को और भी भावुक बना दिया।
भारत और श्रीलंका के बीच स्थित पाल्क स्ट्रेट को पार करना दुनिया के सबसे कठिन समुद्री तैराकी अभियानों में से एक माना जाता है। तेज धाराएं, समुद्री जीव और अनिश्चित मौसम इस चुनौती को और भी कठिन बना देते हैं। ऐसे में इतनी कम उम्र में इस कारनामे को अंजाम देना इशांक की असाधारण क्षमता और मानसिक मजबूती को दर्शाता है।
इशांक सिंह की यह सफलता यह साबित करती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो, तो उम्र कोई मायने नहीं रखती। उनका यह सफर न सिर्फ खेल जगत बल्कि हर क्षेत्र के युवाओं को अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करता है।
