Bengal : नोआपाड़ा में देर रात चली गोलियां, चुनावी माहौल में बढ़ा तनाव; भाजपा और तृणमूल के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज
पश्चिम Bengal में विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है। उत्तर 24 परगना के नोआपाड़ा इलाके में भाजपा नेता कुंदन सिंह के घर पर फायरिंग की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
मतगणना से ठीक पहले उत्तर 24 परगना जिले के नोआपाड़ा क्षेत्र में शनिवार देर रात अचानक गोलियों की आवाज से इलाके में दहशत फैल गई। गारुलिया इलाके में स्थित भाजपा नेता कुंदन सिंह के घर को निशाना बनाकर अज्ञात हमलावरों ने फायरिंग की।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाइक पर सवार दो युवक घर के सामने पहुंचे। पीछे बैठे युवक ने अचानक दो राउंड फायरिंग की और दोनों मौके से फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग भयभीत हो गए।
पूरी वारदात पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। फुटेज के आधार पर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों — आकाश चौधरी और अमनदीप चौधरी — को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपियों के पास से हथियार भी बरामद किया है। फिलहाल यह जांच की जा रही है कि बरामद हथियार का इस्तेमाल इसी फायरिंग में हुआ था या नहीं। अधिकारियों के मुताबिक, मामले की गहराई से जांच जारी है और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश भी की जा रही है।
भारतीय जनता पार्टी ने इस हमले के पीछे तृणमूल कांग्रेस से जुड़े असामाजिक तत्वों का हाथ बताया है।
भाजपा नेता कुंदन सिंह का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे हमलावरों की पहचान हो चुकी है और उनके संबंध तृणमूल नेताओं से जुड़े हैं। नोआपाड़ा से भाजपा प्रत्याशी अर्जुन सिंह ने भी इस घटना को मतगणना से पहले भय का माहौल बनाने की साजिश बताया।
उनका कहना है कि इस तरह की घटनाएं लोकतंत्र के लिए खतरा हैं और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।
वहीं तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी उम्मीदवार तृणांकुर भट्टाचार्य ने साफ कहा कि उनका या उनकी पार्टी का आरोपियों से कोई संबंध नहीं है।
तृणमूल नेताओं का कहना है कि दोषियों को कानून के अनुसार सख्त सजा मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा खुद इस तरह की घटनाओं की साजिश कर सकती है ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके।
घटना के बाद पुलिस ने इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं। संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मतगणना से पहले शांति व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब पूरे राज्य की नजरें मतगणना पर टिकी हुई हैं। ऐसे में इस तरह की हिंसक घटनाएं चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप से जमीनी स्तर पर तनाव बढ़ रहा है, जिसका असर आम जनता पर पड़ रहा है।
नोआपाड़ा में हुई यह फायरिंग सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि चुनावी माहौल में बढ़ते तनाव का संकेत है। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और क्या प्रशासन शांति बनाए रखने में सफल हो पाता है।
