झाड़ग्राम में PM Modi के ‘झालमुड़ी ब्रेक’ को लेकर गरमाई राजनीति, TMC ने लगाया गंभीर आरोप—हेमंत सोरेन की रैली प्रभावित होने का दावा
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के बीच PM Modi के ‘झालमुड़ी ब्रेक’ पर सियासत तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इस वजह से झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की रैली बाधित हुई। जानिए पूरा मामला और राजनीतिक प्रतिक्रिया।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच एक साधारण ‘झालमुड़ी ब्रेक’ अब बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi के झाड़ग्राम दौरे के दौरान स्थानीय स्ट्रीट फूड ‘झालमुड़ी’ खाने का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने इसे मुद्दा बना लिया है।
सबसे बड़ा आरोप All India Trinamool Congress (TMC) की ओर से लगाया गया है, जिसमें कहा गया कि पीएम मोदी के इस ‘झालमुड़ी ब्रेक’ के कारण झारखंड के मुख्यमंत्री Hemant Soren की एक महत्वपूर्ण चुनावी रैली प्रभावित हुई और उन्हें अपना कार्यक्रम अधूरा छोड़कर लौटना पड़ा।
19 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम में चुनावी सभा को संबोधित करने पहुंचे थे। सभा समाप्त होने के बाद उन्होंने एक स्थानीय दुकानदार से ‘झालमुड़ी’ खरीदी और वहीं खड़े होकर खाई। इस दौरान उन्होंने दुकानदार से बातचीत भी की, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
हालांकि, यह सामान्य घटना जल्द ही राजनीतिक रंग ले गई। TMC ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में अचानक बढ़े समय के कारण हवाई यातायात और सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव किया गया, जिससे हेमंत सोरेन के हेलिकॉप्टर को झाड़ग्राम में उतरने की अनुमति नहीं मिली।
तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के ‘झालमुड़ी ब्रेक’ को महज एक फोटो ऑप बताया गया।
पार्टी का कहना है कि:
- पीएम मोदी के वहां ज्यादा देर रुकने के कारण सुरक्षा कारणों से अन्य वीआईपी मूवमेंट रोक दिया गया
- झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन को हेलिकॉप्टर लैंडिंग की अनुमति नहीं दी गई
- उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ा
- अंततः उन्हें अपना कार्यक्रम अधूरा छोड़कर रांची लौटना पड़ा
TMC ने इसे “लोकतांत्रिक अधिकारों का अपमान” और “आदिवासी नेताओं की अनदेखी” करार दिया।
TMC ने अपने बयान में यह भी कहा कि यह घटना आदिवासी नेताओं के प्रति केंद्र सरकार के रवैये को दर्शाती है। पार्टी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री वोट मांगने के लिए आदिवासी क्षेत्रों में जाते हैं, लेकिन व्यवहार में उनके प्रतिनिधियों का सम्मान नहीं करते।
हालांकि, इन आरोपों पर अभी तक प्रधानमंत्री कार्यालय या भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत उस वीडियो से हुई, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी झाड़ग्राम की एक दुकान पर ‘झालमुड़ी’ खाते नजर आ रहे हैं। वीडियो में वह दुकानदार से पूछते हैं कि “झालमुड़ी कितने की है?” और फिर पैसे देने के लिए जेब में हाथ डालते हैं।
जब दुकानदार उनसे पूछता है कि “क्या आप प्याज खाते हैं?”, तो पीएम मुस्कुराते हुए जवाब देते हैं—“हां, प्याज खाते हैं, बस दिमाग नहीं खाते।” यह संवाद सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है और लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल पहले से ही गरम है, और ऐसे में इस तरह के घटनाक्रम राजनीतिक बहस को और तेज कर रहे हैं।
एक ओर भाजपा इसे प्रधानमंत्री का आम लोगों से जुड़ने का प्रयास बता रही है, वहीं विपक्ष इसे “इवेंट मैनेजमेंट” और “राजनीतिक दिखावा” करार दे रहा है।
इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि हेमंत सोरेन की रैली वास्तव में पीएम मोदी के ‘झालमुड़ी ब्रेक’ की वजह से रद्द हुई या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी समय में इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप आम होते हैं और हर पार्टी अपने राजनीतिक फायदे के लिए मुद्दों को उछालती है।
‘झालमुड़ी ब्रेक’ जैसी साधारण घटना अब एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन चुकी है। जहां एक तरफ यह प्रधानमंत्री की आम जनता से जुड़ने की छवि को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में बाधा और राजनीतिक स्टंट बता रहा है।
अब देखना यह होगा कि इस विवाद का चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ता है और क्या इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आता है।
