CBSE 10th Result 2026 : झारखंड में 5वां स्थान हासिल कर सात्विक बने प्रेरणा, अब डॉक्टर बनकर समाज सेवा का सपना
CBSE 10th Result 2026 : देवघर के सात्विक राज ने CBSE 10वीं में 98.8% अंक लाकर झारखंड में 5वां स्थान प्राप्त किया। बिना कोचिंग के हासिल की गई इस सफलता ने उन्हें हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा बना दिया है।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा घोषित 10वीं परीक्षा परिणाम में इस वर्ष देशभर के लाखों छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया। इसी कड़ी में झारखंड के देवघर जिले के सात्विक राज ने 98.8 प्रतिशत अंक हासिल कर न सिर्फ अपने जिले बल्कि पूरे राज्य का नाम रोशन कर दिया है। सात्विक ने पूरे झारखंड में 5वां स्थान प्राप्त कर एक नई मिसाल पेश की है।
देवघर के जसीडीह स्थित सिमरिया गांव के रहने वाले सात्विक राज ने यह उपलब्धि बिना किसी कोचिंग के हासिल की है। उनकी इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि यदि मेहनत, लगन और सही दिशा में प्रयास किया जाए, तो सीमित संसाधनों में भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
सात्विक राज, डीएवी भंडारकोला स्कूल के छात्र रहे हैं। उनके पिता रवि शंकर एक इंश्योरेंस कंपनी में मैनेजर हैं, जबकि उनकी माता प्रियंका देवी एक गृहिणी हैं। साधारण परिवार से आने के बावजूद सात्विक को अपने माता-पिता से हमेशा पढ़ाई के लिए प्रोत्साहन और सहयोग मिलता रहा।
उनकी सफलता में परिवार का यह समर्थन एक मजबूत आधार साबित हुआ। माता-पिता ने न केवल उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया, बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत बनाए रखा।
सात्विक के विषयवार अंक उनके संतुलित अध्ययन और मेहनत को दर्शाते हैं। उन्होंने गणित और सोशल साइंस में 97-97 अंक, साइंस और इंग्लिश में 99-99 अंक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में 99 और संस्कृत में 100 अंक हासिल किए हैं।
कुल मिलाकर 98.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर उन्होंने यह साबित किया कि सभी विषयों में समान ध्यान देना सफलता की कुंजी है।
सात्विक अपनी सफलता का श्रेय निरंतरता (Consistency) को देते हैं। उनका मानना है कि पढ़ाई में घंटों की संख्या मायने नहीं रखती, बल्कि यह जरूरी है कि आप कितने फोकस और समर्पण के साथ पढ़ाई करते हैं।
वह बताते हैं कि जब भी वे किसी विषय को पढ़ने बैठते थे, तब तक नहीं उठते थे जब तक वह टॉपिक पूरी तरह समझ में न आ जाए। यही आदत उनकी सफलता का सबसे बड़ा कारण बनी।
आज के दौर में जहां अधिकतर छात्र कोचिंग संस्थानों पर निर्भर रहते हैं, वहीं सात्विक ने बिना कोचिंग के यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने अपनी पढ़ाई के लिए यूट्यूब और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का सहारा लिया।
डिजिटल माध्यमों का सही उपयोग करते हुए उन्होंने खुद को तैयार किया और यह साबित किया कि सही दिशा में किया गया आत्म-अध्ययन भी उतना ही प्रभावी हो सकता है।
सात्विक के लिए यह सफर आसान नहीं था। उन्होंने खुद स्वीकार किया कि सोशल साइंस (SST) विषय उन्हें सबसे कठिन लगता था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और इसी विषय पर सबसे ज्यादा मेहनत की।
लगातार अभ्यास, रिवीजन और समझ के जरिए उन्होंने अपनी कमजोरी को ताकत में बदल दिया। यही जज़्बा उन्हें अन्य छात्रों से अलग बनाता है।
पढ़ाई के दौरान तनाव आना स्वाभाविक है, लेकिन सात्विक ने इसे अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने आध्यात्मिक गतिविधियों और सकारात्मक सोच के जरिए खुद को संतुलित रखा।
यह तरीका उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखने में काफी मददगार साबित हुआ।
वर्तमान में सात्विक राज देवघर में रहकर NEET परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। उनका सपना है कि वह एक सफल डॉक्टर बनें और समाज की सेवा करें।
उनकी यह सोच न सिर्फ उनके लक्ष्य को दर्शाती है, बल्कि समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी को भी उजागर करती है।
सात्विक की सफलता उन छात्रों के लिए एक प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के कारण खुद को पीछे समझते हैं। उनकी कहानी यह सिखाती है कि अगर मेहनत सच्ची हो और लक्ष्य स्पष्ट हो, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती।
