Jharkhand में मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति को तेज कर दिया है। पार्टी ने राज्य की 81 विधानसभा सीटों पर अपने विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को बूथ लेवल एजेंट-1 (बीएलए-1) के रूप में तैनात कर दिया है।
इस कदम के जरिए भाजपा सीधे बूथ स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। रांची में हाल ही में हुई प्रदेश कमेटी की बैठक में यह निर्णय लिया गया, जहां प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने सभी विधायकों को यह जिम्मेदारी सौंपी।
घर-घर सत्यापन और मतदाता सूची शुद्धिकरण पर जोर
एसआईआर प्रक्रिया के तहत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार घर-घर जाकर मतदाता गणना फॉर्म भरे जा रहे हैं। भाजपा के बीएलए यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे और किसी भी संदिग्ध नाम की गहन जांच हो।
पार्टी इस पूरी प्रक्रिया को अत्यंत रणनीतिक मानकर चल रही है। नेताओं को निर्देश दिया गया है कि वे बूथ स्तर पर सक्रिय रहकर मतदाता सूची को अंतिम रूप देने में पूरी निगरानी रखें। भाजपा का मानना है कि यह अभियान आगामी चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव का मुद्दा बना केंद्र में
भाजपा लगातार आरोप लगाती रही है कि झारखंड में जनसांख्यिकीय बदलाव हो रहा है और मतदाता सूची में अवैध घुसपैठियों के नाम शामिल हो रहे हैं। विशेष रूप से संताल परगना और कोल्हान क्षेत्रों को पार्टी इस मुद्दे का केंद्र मान रही है।
पार्टी का दावा है कि एसआईआर के जरिए ऐसे नामों को सूची से हटाने और मतदाता सूची को शुद्ध करने का काम किया जाएगा। साहिबगंज और पाकुड़ जैसे जिलों को घुसपैठ के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में चिन्हित किया गया है, जहां विशेष निगरानी रखी जा रही है।
विधायकों को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी, चुनावी तैयारी तेज
भाजपा ने अपने प्रमुख विधायकों को अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी है, ताकि हर क्षेत्र में प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके। बाबूलाल मरांडी, चंपाई सोरेन, चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह सहित कई वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं।
पार्टी इस पूरी कवायद को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक मजबूत चुनावी रणनीति के रूप में देख रही है। भाजपा का मानना है कि बूथ स्तर पर मजबूत नियंत्रण और मतदाता सूची की शुद्धता आगामी चुनावों में उसके लिए बड़ा लाभ साबित हो सकती है।
