Jharkhand News: झारखंड की उपराजधानी दुमका में सोमवार को कोर्ट परिसर के बाहर उस समय स्थिति पूरी तरह तनावपूर्ण हो गई जब दो अलग-अलग मामलों में न्याय की तलाश में पहुंची महिलाएं आमने सामने आ गईं। आमतौर पर शांत रहने वाला कोर्ट परिसर कुछ ही देर में ‘रणक्षेत्र’ में तब्दील हो गया जहां कानून की बहस से ज्यादा चीख-पुकार और हंगामा सुनाई देने लगा। इस दौरान मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों के सामने स्थिति को संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया। यह घटनाक्रम पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया है और लोगों के बीच इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि निजी विवाद किस हद तक सार्वजनिक मंच पर पहुंच सकते हैं।
पहला मामला और कोर्ट परिसर में मारपीट का दृश्य.
पहला मामला मसलिया थाना क्षेत्र के डुमरी गांव का है जहां नुरेमान अंसारी पर उनकी पहली पत्नी सबेरा खातून ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि नुरेमान ने बिना तलाक दिए और बिना जानकारी के दूसरी शादी कर ली। जैसे ही नुरेमान कोर्ट पहुंचा तो सबेरा खातून और उनके परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। कोर्ट परिसर के बाहर ही उस पर थप्पड़ों की बरसात शुरू हो गई जिससे वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी भी कुछ देर के लिए असहज हो गए। करीब आधे घंटे तक चले इस हंगामे के बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया और नुरेमान तथा उसकी पत्नी को नगर थाना ले जाया गया। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि पारिवारिक विवाद किस तरह सार्वजनिक हिंसा का रूप ले रहे हैं।
दूसरे मामले में भावुक दृश्य और विरोध का अनोखा तरीका.
इसी बीच जरमुंडी क्षेत्र से जुड़ा दूसरा मामला और भी भावुक और नाटकीय बन गया। यहां मनकी देवी ने अपने पति रामभरण दास पर आरोप लगाया कि उन्होंने 16 साल के वैवाहिक जीवन को नजरअंदाज कर दूसरी शादी कर ली। कोर्ट परिसर में ही मनकी देवी ने अपने पति को पकड़ लिया और जब वह भागने लगा तो उन्होंने उसका पैर पकड़कर जमीन पर बैठकर विरोध जताया। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोग भी हैरान रह गए। दूसरी पत्नी के पिता भी मौके पर मौजूद थे और वे रामभरण से अपनी बेटी के बारे में जानकारी मांग रहे थे। करीब एक घंटे तक चले इस हाई वोल्टेज ड्रामे ने पूरे माहौल को भावनात्मक और तनावपूर्ण बना दिया।
पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल.
इन दोनों घटनाओं के बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और संबंधित मामलों को अपने कब्जे में ले लिया है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की त्वरित कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते पर्याप्त सुरक्षा होती तो स्थिति इतनी बिगड़ती नहीं। इन घटनाओं ने समाज में बढ़ते पारिवारिक विवादों और उनके सार्वजनिक प्रदर्शन की प्रवृत्ति को भी उजागर किया है। फिलहाल दोनों मामलों की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला केवल एक विवाद नहीं बल्कि सामाजिक और कानूनी व्यवस्था के बीच संतुलन की चुनौती को भी सामने लाता है।
