Jharkhand News: सिडनी स्थित भारतीय वाणिज्यिक दूतावास में अंतरराष्ट्रीय बिहार दिवस बड़े उत्साह और भव्यता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बिहारी अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में प्रवासी भारतीयों की बड़ी भागीदारी रही। पूरबी इंटरनेशनल और बिहार-झारखंड कम्युनिटी ऑस्ट्रेलिया के संयुक्त तत्वावधान में यह आयोजन हुआ। उपस्थित लोगों ने बिहार की संस्कृति, परंपरा और योगदान को बड़े उत्साह से सराहा।
दूतावास अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में कॉन्सुलेट जनरल Dr. S. Janakiraman और डिप्टी कॉन्सुलेट जनरल Neerav Sutaria मौजूद रहे। अपने संबोधन में डॉ. जानकीरमण ने बिहार की मेधा और मेहनत की सराहना की और इसे “अद्वितीय” बताते हुए वैश्विक पहचान पर जोर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने उनके विचारों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
बिहारी स्वाभिमान और नई पहल
नियाड ग्रुप के चेयरमैन Praveen Kumar ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि दूतावास में बिहार केंद्रित कार्यक्रमों की बढ़ती संख्या गौरव का संकेत है। उन्होंने “5 बिहारी – 1 स्टार्टअप” का आह्वान किया और शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को विकास की कुंजी बताया। पूरबी इंटरनेशनल की संस्थापक Neeta Kumari ने प्रवासियों को बिहार से जोड़ने पर जोर देते हुए एनआरआई परिवारों के लिए ग्लोबल हेल्पलाइन की घोषणा की।
संजीव मुकेश को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान
इस अवसर पर कवि Sanjeev Mukesh को “प्रथम अंतरराष्ट्रीय बिहार गौरव सम्मान” से सम्मानित किया गया। उन्हें अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह और 2.51 लाख रुपये प्रदान किए गए। सम्मान समारोह के बाद संजीव मुकेश ने अपनी ओजस्वी कविताएं प्रस्तुत कीं, जिससे प्रवासी भारतीयों के दिलों में बिहार के प्रति गर्व और जुड़ाव और गहरा हुआ। नालंदा जिले के जीयर गांव के निवासी संजीव मुकेश आज हिंदी और मगही साहित्य में एक स्थापित नाम हैं और उनके गीत तथा रचनाएं संस्कृति, संस्कार और जागरूकता का संदेश देती हैं।
